आज गुरुकुल आश्रम तुरंगा में छत्तीसगढ़ प्रवास पर पधारे आलोक कुमार का आगमन एवं रात्रि विश्राम अत्यंत सौभाग्यपूर्ण एवं प्रेरणादायी रहा।
मुकेश प्रसाद द्विवेदी कोटमी
आज गुरुकुल आश्रम तुरंगा में छत्तीसगढ़ प्रवास पर पधारे आलोक कुमार का आगमन एवं रात्रि विश्राम अत्यंत सौभाग्यपूर्ण एवं प्रेरणादायी रहा।
प्रातःकाल जब आप दैनिक हवन हेतु यज्ञ वेदी पर विराजमान हुए, तब आचमन से लेकर ईश्वर स्तुति, प्रार्थना एवं उपासना तक समस्त वैदिक मंत्रों का आपका शुद्ध एवं भावपूर्ण उच्चारण सुनकर मैं स्तब्ध रह गया। यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि आपकी पूज्य माताजी के आर्य समाजीय संस्कार आपमें गहराई से समाहित हैं तथा वही दिव्य संस्कार आपके व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित होते हैं।
यह जानकर भी हर्ष हुआ कि आपके पूज्य दादाजी एवं परिवार के अन्य सदस्य गुरुकुल कांगड़ी के विद्यार्थी रहे हैं। साथ ही रामनाथ वेदालंकार जी जैसे विद्वान का आपके परिवार से संबंध होना अत्यंत गौरव का विषय है।
आप सदैव आर्य समाज के कार्यक्रमों एवं आयोजनों में आत्मीयता से सहभागिता करते हैं। आपके हृदय में स्वामी दयानंद सरस्वती एवं स्वामी श्रद्धानंद जी के प्रति अगाध श्रद्धा एवं सम्मान स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।
गुरुकुल आश्रम तुरंगा का समस्त परिवार आपके पावन आगमन पर हृदय से अभिनंदन, स्वागत एवं शुभकामनाएँ व्यक्त करता है।