सहायक आयुक्त के एफ आईआर पर प्रसाशन क्यों मौन
आदिवासी विभाग में हुआ था घोटाला
उमरिया। आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्ताधर्ताओं पर भले ही कलेक्टर ने एफआईआर के निर्देश दियें हो, मगर पत्र लिखे कई हफ्तों का समय बीत गया, लेकिन मुखिया द्वारा लिखे पत्र पर जवाबदार अधिकारी एफआईआर कर पाने में असफल हैं, आजाक विभाग में हुए करोड़ो रुपये के घोटाले के बाद जिले के मुखिया वर्तमान संजीव श्रीवास्तव ने जांच स्वयं की तो पता चला कि आजाक विभाग के जवाबदार अधिकारियों की मिली भगत में राशि का वारा न्यारा किया है, जिसके बाद आजाक विभाग के मुखिया आनंद राय सिन्हा लेखापाल रहे, बृजेन्द्र सिंह और चहेते ठेकेदार मुकेश दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने हेतु पुलिस अधीक्षक को जिले के मुखिया द्वारा स्वयं पत्र लिखा गया है, लेकिन आज दिनांक तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है।
कर्मचारी के मिली से भ्रष्टाचार
जिले के छात्रावासो के रंगरोगन के लिये 72 लाख रुपये शासन द्वारा दिया गया, जिसमें प्रत्येक छात्रावासो के लिए 4 हजार रुपये खर्च किये जाने थे, लेकिन कुछ गिने चुने छात्रावासो में केवल पेंटिंग का कार्य वो भी अधूरा किया गया और 10 दिन के अंदर ही पूरी राशि का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया, जबकि निविदा करकेली ब्लॉक के लिए 26.55 लाखए पाली ब्लॉक के लिए 25.55 लाख और मानपुर के लिए 26.67 लाख रुपये न्यूनतम दर पर स्वीकृत की गई थी, लेकिन उक्त न्यूनतम राशि की कटौती नही की गई और ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया। यदि राशि काटी गई है तो उक्त राशि शासन के खजाने में होनी चाहिए, लेकिन स्वीकृत राशि से अधिक देय की राशि का भुगतान किया गया। इस तरह से ठेकेदार को लाभ पहुंचाने में विभाग के लिपिक और सहायक आयुक्त ने मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया।
अमानत का खेल
स्वीकृत निविदा में 15 प्रतिशत की राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। अधिक न्यूनतम होने पर उक्त राशि जो अधिक हो ठेकेदार के द्वारा संयुक्त नाम से विभाग एवं ठेकेदार जमा की जाती है, जो कि अलग-अलग होना चाहिए। संबंधित अधिकारियो ने ठेकेदार से कोई एफ डी आर की राशि जमा करने के निर्देश जारी नहीं किये। 2 लाख से अधिक एफ डी आर का सत्यापन विभाग द्वारा संबंधित बैंक से कराया जाना चाहिए था जो कि नहीं कराया गया, ऐसी स्थिति में जमा एफ डी फर्जी होने से नकारा नहीं जा सकता। प्रस्तुत निविदा के बिंदु 9 में 5 प्रतिशत की राशि अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में जमा होती है जो कि विभाग द्वारा ठेकेदार से जमा नहीं कराई गई।
पुरानी बाउंड्री बाल की निकाली गई निविदा
जिले के करकेली ब्लॉक स्थित ग्राम कॉलोनी और मानपुर ब्लॉक के भरेवा, अमरपुर में बाउंड्रीवाल स्वीकृत किया गया, जो प्रति छात्रावास की बाउंड्री के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किया गया। अमरपुर बालक छात्रावास में वर्ष 2002.3 में बालक छात्रावास भरेवा में वर्ष 2009.10 में और कालोनी कन्या छात्रावास में वर्ष 2013.14 में छात्रावास के चारो ओर पूर्व से ही बाउंड्रीवाल बनी हुई थी, जिसे पुन: स्वीकृत कर सारी राशि का बंदरबांट ठेकेदार, सहायक आयुक्त और लिपिक द्वारा कर दिया गया। इन सब के बाद कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने पुलिस को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिये लेकिन पता नही किस कारण वश आज दिनांक तक वह पत्र कोतवाली पुलिस तक नही पहुंच सका है।
इनका कहना है…
मेरा जो काम था मैने करके पुलिस को भेज दिया, पुलिस अपना काम करेगी।
संजीव श्रीवास्तव
कलेक्टर, उमरिया