कहो तो कह दूॅ………स्थानांतरण नीति को लगा जंग
अनूपपुर से अजय नामदेव
अनूपपुर। आदिवासी विकास विभाग में स्थानांतरण नीति को जंग लगा हुआ है। जिला मुख्यालय संचालित लगभग छात्रावासें में पदस्था अधीक्षिकों और अधीक्षिकाओं की पदस्थापना को आज वर्षों बीत गये किन्तु शासन के नियमों की अवहेलना की जा रही है। अधिकतम 3 साल से अधिक हो गये लेकिन अभी तक जमे हुये हैं। जिला मुख्यालय भर नहीं कुछ ऐसा ही हाल जैतहरी व पुष्पराजगढ ब्लाक का भी है।
तो फिर दिख सकता है माननीय का जलबा
भारत की नंबर 1 कहे जाने वाला राजनैतिक दल में मण्डल चुनाव के संपन्न होंने के बाद माननीय का जलवा भगवादल के लोगों को दिख ही चुका है जिस प्रकार उन्होने संगठन में अपने लोगों को जगह दिलाई। और विरोधियों को एक भी मण्डल में जगह नहीं मिल पाई। अब तो एक दो दिनों में जिले की कमान भी सौंपी जानी है। लेकिन जिस प्रकार से बीता चुनाव हुआ है उससे ऐसा ही लग रहा है कि जिला स्तर के चुनाव में भी माननीय का जलवा दिखाई देगा।
कम से कम एक मण्डल तो दो
जिस प्रकार से जिला मुख्यालय के नगर मण्डल की घोषणा नहीं हुई है और विरोधी गुट पूर्व के अध्यक्ष को रिपीट कराना चाह रही है लेकिन लगता ऐसा हो नहीं पा रहा है। यदि होता भी तो अभी तक घोषणा भी हो ही जाती। घोषणा के बाद विरोधी गुट में चर्चायें की जा रही है कि कम से कम अनूपपुर विधानसभा में एक मण्डल को हमारे गुट को दे दो। आखिर कहें भी क्यों न,बात जिला मुख्यालय की है।
पुरानी गलती को कर रहे याद
बीते पखवाडें भर से जिले में सबसे धनी नगरपालिका में राजनीति की सरगर्मी बढ गई। जिस प्रकार से सप्ता पक्ष के एक नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि ने पूर्व में सत्ता में रह चुकी पार्टी के पदाधिकारियों पर मामला दर्ज कराने में पर्दे के पीछे रहकर खेल खेला उससे अब पूर्व में सत्ता पक्ष में रह चुके लोग अपनी पुरानी गल्ती को याद कर मनमसोस रहे हैं। उन्हे याद आ रहा है कि किस प्रकार नगरपालिका में वर्तमान जनप्रतिनिधि को लीड दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाये थे, लेकिन अब क्यों पछता रहे हैं। पहले ही गलती नहीं करना था।