96 घंटे की मुस्तैदी, 80 विसर्जन स्थलों पर पहरा जब हजारों कदम विसर्जन की राह पर थे, तब हर रास्ते पर वर्दी का फर्ज निभा रहीं थी पुलिस,सतर्कता से शांतिपूर्ण संपन्न हुए धार्मिक आयोजन
96 घंटे की मुस्तैदी, 80 विसर्जन स्थलों पर पहरा
जब हजारों कदम विसर्जन की राह पर थे, तब हर रास्ते पर वर्दी का फर्ज निभा रहीं थी पुलिस,सतर्कता से शांतिपूर्ण संपन्न हुए धार्मिक आयोजन
कटनी।। दिलीप((गोलू शुक्ला))।। शहर में जब आस्था के जुलूस निकल रहे थे, घाटों पर विसर्जन हो रहा था और लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां मना रहे थे, तब सड़कों, चौराहों और संवेदनशील स्थलों पर खाकी वर्दी अपने फर्ज पर डटी थी। किसी की खुशी में खलल न पड़े, श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे और हर आयोजन शांति से संपन्न हो इसी जिम्मेदारी के साथ कटनी पुलिस के अधिकारी और जवान लगातार मैदान में तैनात रहे। क्योंकि शांतिपूर्ण त्योहार केवल उत्सव मनाने वालों की खुशी नहीं होते, बल्कि उस जिम्मेदारी की भी कहानी होते हैं जिसे निभाने के लिए कुछ लोग दूसरों की खुशियों के बीच अपनी नींद तक कुर्बान कर देते हैं। त्योहारों की रौनक तभी बरकरार रहती है, जब श्रद्धालु बिना किसी भय के अपने धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सकें और शहर की सड़कों से लेकर विसर्जन घाटों तक सुरक्षा का भरोसा कायम रहे। कटनी में गणेश विसर्जन, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, जवारा विसर्जन, गरबा और दशहरा पर्व के दौरान पुलिस की भूमिका इसी जिम्मेदारी की एक महत्वपूर्ण मिसाल बनकर सामने आई। लगातार कई दिनों तक तैनात पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर सतर्कता के बीच जिले में धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। प्राप्त जानकारी के अनुसार , जिले के 80 विसर्जन स्थलों पर 1250 से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं और लगभग 800 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। गणेश विसर्जन के दौरान 48 घंटे तथा दुर्गा विसर्जन और दशहरा पर्व के समय लगातार 96 घंटे तक पुलिसकर्मी दिन-रात सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे। यह तैनाती केवल कानून-व्यवस्था संभालने की औपचारिक जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ के व्यवस्थित संचालन और संभावित विवादों को रोकने की व्यापक कवायद का हिस्सा थी।
त्योहारों की खुशी के पीछे पुलिस की सतत निगरानी
धार्मिक जुलूसों और विसर्जन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के कारण सुरक्षा प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में मार्गों पर भीड़ का नियंत्रण, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटना पुलिस के लिए अहम जिम्मेदारियां होती हैं। कटनी में इसी उद्देश्य से पहले से सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की गई और शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य के नेतृत्व में अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की। विसर्जन कार्यक्रमों के समापन तक वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रहे और आवश्यकतानुसार अधीनस्थ अमले को दिशा-निर्देश देते रहे। शहरी क्षेत्रों में डीएसपी मुख्यालय रत्नेश मिश्रा और उप पुलिस अधीक्षक अनिमेष द्विवेदी सहित थाना प्रभारियों ने मोर्चा संभाला, वहीं ग्रामीण इलाकों में भी पुलिस अधिकारियों ने घाटों, जुलूस मार्गों तथा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की।
सुरक्षा का उद्देश्य केवल तैनाती नहीं, खतरे को समय रहते रोकना
पुलिस की कर्तव्यपरायणता का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब संभावित खतरे को घटना में बदलने से पहले ही नियंत्रित कर लिया जाए। इसी दृष्टिकोण के तहत जुलूस मार्गों और संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। सुभाष चौक, आजाद चौक, गोल बाजार, गाटर घाट, बैलेटघाट, खिरहनी थाने के सामने और भट्टा मोहल्ला सहित विभिन्न क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, अवैध हथियार लेकर घूम रहे लोगों को पकड़कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी की गई। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों, विसर्जन स्थलों तथा संवेदनशील मार्गों पर नजर रखी गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल ध्यान देकर शांति व्यवस्था को प्रभावित होने से रोकना था।
अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर भी सक्रिय रहा अमला
त्योहारों के दौरान पुलिस ने धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा के साथ-साथ नियमित कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर भी ध्यान केंद्रित रखा। जारी आंकड़ों के मुताबिक, अवैध हथियार रखने के मामलों में 28 व्यक्तियों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। आबकारी अधिनियम के अंतर्गत 685 प्रकरण दर्ज किए गए और 690 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। इसके अलावा 213 व्यक्तियों के विरुद्ध बीएनएसएस के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, जबकि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 126/135 बीएनएसएस के अंतर्गत 2173 प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां की गईं। नशे में वाहन चलाने के मामलों में मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत 545 चालकों के वाहनों की जब्ती की कार्रवाई का उल्लेख भी प्रेस नोट में है। पुलिस ने 1096 आदतन अपराधियों की जांच एवं निगरानी की और 19 जिला बदर व्यक्तियों की चेकिंग की। विभिन्न मामलों में लंबे समय से फरार 418 वारंटियों की तलाश कर गिरफ्तारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ये आंकड़े बताते हैं कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन के साथ कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई।
महिला सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता
नवरात्रि और गरबा कार्यक्रमों में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षित भागीदारी सुनिश्चित करना भी पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल रहा। गरबा पंडालों में महिला पुलिसकर्मियों को पारंपरिक वेशभूषा में सादे कपड़ों के साथ तैनात किया गया, ताकि वे भीड़ के बीच रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकें। चीता पार्टी और एफआरवी ने रात आठ बजे से सुबह दो बजे तक गरबा स्थलों तथा आसपास के इलाकों में गश्त की। सुबह मंदिरों में दर्शन के लिए जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई।
गणेश विसर्जन के लिए लगभग 500, जवारा विसर्जन के लिए 200 तथा दुर्गा विसर्जन, गरबा और दशहरा पर्व के लिए करीब 600 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इस व्यापक प्रबंध के पीछे उद्देश्य था कि उत्सव में शामिल होने वाले नागरिकों को सुरक्षित वातावरण मिले और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस तत्काल उपलब्ध रहे। लगातार ड्यूटी, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, संदिग्धों की जांच, महिला सुरक्षा के विशेष इंतजाम और वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता यह स्पष्ट करते हैं कि त्योहारों के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं थी। उसका महत्वपूर्ण उद्देश्य आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का विश्वास बनाए रखना, श्रद्धालुओं को निर्भय होकर धार्मिक परंपराओं में शामिल होने का अवसर देना और किसी भी संभावित तनाव को समय रहते रोकना था।