मामा के दौरे के बाद भी क्यों लगा भाजपा की जीत पर ग्रहण

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(शुभम तिवारी+7879308359)
शहडोल। नगर पालिका धनपुरी में मतदान से पहले मध्यप्रदेश में चौथी बार मुख्यमंत्री बने लोकप्रिय, जनप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान धनपुरी में पार्षदों के लिए वोट मांगने आये थे, इस दौरान उन्होंने धनपुरी के जिन वार्डाे में भ्रमण किया और सभा का आयोजन किया, अपवाद के तौर पर एकाध वार्ड को छोड़ दिया जाये तो, बाकी के वार्डाे में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी, वह जनता जो बीते विधान सभा चुनाव से लेकर लोकसभा और निकाय चुनावों में 15 सालों से भाजपा को वोट देते आई है, वह अपने जनप्रिय नेता के वार्ड में आने और उसके निवेदन को जनता ने आखिर क्यों ठुकरा दिया, यह सोचनीय पहलू है, आखिर धनपुरी में ऐसा क्या हुआ, जो जनता को नगवार गुजरा और उसने उस पार्टी को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिसको उसने सबसे पहले सर आंखों पर बिठाया था।
शिवराज सिंह चौहान का जब धनपुरी में दौरा हुआ तो, बुढ़ार से धनपुरी प्रवेश के दौरान कॉलेज चौराहे पर उनका स्वागत हुआ, यह चौराहा वार्ड नंबर 1, 2 और 3 से घिरा हुआ है, यहां वार्ड नंबर 2 और 3 में भाजपा हार गई, जबकि वार्ड नंबर 1 में 5 सालों तक धनपुरी की सत्ता पर रहने और अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा काम करने वाले तथा धनपुरी की तुलना महानगरों से करने वाले नेता साथ ही दो बार भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे इन्द्रजीत सिंह छाबड़ा की जीत दहाई में ही सिमट गई, जबकि उनके वार्ड से कोयलांचल के कांग्रेस नेता शोभाराम पटेल ने भाजपा के ही पूर्व नपाध्यक्ष को हराकर बड़ी जीत हासिल की।
इसके आगे के वार्ड नंबर 4 भी चंद वोटों से भाजपा ने जीता और फिर आगे के पूरे वार्ड 17,18, 19 और वार्ड नंबर 21 जहां शिवराज सिंह चौहान ने सभा का आयोजन कर धनपुरी और बकहो की जनता को संबोधित किया और चुनाव जिताने की अपील की, ये सभी वार्ड भाजपा हार गई। अचरज तो इस बात का है कि शिवराज सिंह जिस पड़ोस की नगर परिषद बकहो में नहीं गये, वहां भाजपा बहुमत में आ गई।
भाजपा के शहडोल से लेकर भोपाल में बैठे रणनीतिकारों और संगठन से लेकर सत्ता में बैठे लोगों के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी धनपुरी में घटे जनाधार को लेकर चिंता में डाल दिया है, अगले साल 2023 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और जैतपुर विधानसभा की जीत और हार जिले की सबसे बड़ी नपा में शामिल धनपुरी ही तय करती है, 28 सीटों में से 19 में करारी हार के बाद भी भाजपा भले ही जोड़-तोड़कर सत्ता में बैठ जाये, लेकिन धनपुरी की जनता जिसमें पढ़े-लिखे और बुद्धजीवियों का प्रतिशत अधिक है, उसकी न सिर्फ पूरे घटना क्रम पर नजर है, बल्कि यह चर्चाएं नगर के चौराहों पर हो रही हैं, आम लोगों का यह भी कहना है कि 15 से अधिक सालों पहले जनता ने हंसराज तनवर को भाजपा के बैनर तले नगर की सत्ता सौंपी थी और अब कांग्रेस को बहुमत दिया है।

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