सूदखोरी के जाल में फंसा कोयलांचल: धनपुरी में गरीब का सोना हड़पा, न्याय न मिलने पर पीड़ित आत्महत्या को मजबूर
शहडोल (ब्यूरो)। धनपुरी थाना क्षेत्र में अवैध सूदखोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने खाकी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गरीब व्यक्ति ने अपनी पत्नी का जेवर गिरवी रखकर कर्ज क्या लिया, वह अपनी जीवनभर की पूंजी और मानसिक शांति दोनों हार बैठा। महीनों से थानों और कलेक्टर कार्यालय की चौखट घिसने के बाद भी जब हार वापस नहीं मिला और पुलिस ने केवल कागजी खानापूर्ति की, तो अब पीड़ित हताशा में आत्मघाती कदम उठाने की बात कह रहा है।
FIR की जगह NCR
धनपुरी निवासी मोहम्मद इरशाद के लिए अगस्त 2022 का वह दिन अभिशाप बन गया, जब तंगी के कारण उसने सूदखोर के पास पत्नी का सवा दो तोला सोने का हार गिरवी रखा। आज हालात यह हैं कि मूल और ब्याज चुकाने के बाद भी सूदखोर हार लौटाने को तैयार नहीं है। पुलिस एफआईआर के बजाय समझौते का दबाव बना रही है, जिससे प्रताड़ित होकर पीड़ित अब आत्महत्या की कगार पर पहुँच गया है।
ब्याज का ‘विषैला’ चक्र : 50 हजार के बदले 1.20 लाख की मांग
पीड़ित मोहम्मद इरशाद ने बताया कि कोरोना काल के बाद व्यापार ठप होने पर उसने बालमुकुंद अग्रवाल (उर्फ मामा) से 5% मासिक ब्याज पर 50,000 रुपये लिए थे। एक साल तक निरंतर 2500 रुपये महीना ब्याज भरने के बाद जब पीड़ित ने मूल राशि लौटाकर अपनी पत्नी का सवा दो तोला सोने का हार वापस मांगा, तो आरोपी की नीयत डोल गई। अब आरोपी उस पर 1,20,000 रुपये देने का नाजायज दबाव बना रहा है।
पुलिस की ‘एनसीआर’ वाली खानापूर्ति और संदिग्ध भूमिका
हैरानी की बात यह है कि जब मामला थाने पहुँचा, तो धनपुरी पुलिस ने इसे संज्ञेय अपराध मानकर एफआईआर दर्ज करने के बजाय महज एनसीआर (NCR No. 0365/2025) काटकर पल्ला झाड़ लिया। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि पुलिस अब केवल धारा 179 के नोटिस देकर औपचारिक पूछताछ कर रही है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस उसे न्याय दिलाने के बजाय आरोपी के साथ ‘सेटिंग’ और समझौता करने को कह रही है, जिससे सूदखोर के हौसले बुलंद हैं।
कलेक्टर और एसपी से भी नहीं मिली राहत
दस्तावेजों की फाइल चीख-चीख कर कह रही है कि पीड़ित ने न्याय के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। 23 दिसंबर 2025 से लेकर 10 फरवरी 2026 तक, लगातार तीन बार कलेक्टर जनसुनवाई और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन दिए गए। पावती क्रमांक 6215 और 48 इस बात के गवाह हैं कि प्रशासन के पास शिकायत तो पहुँची, लेकिन समाधान शून्य रहा। पीड़ित का कहना है कि “जब रक्षक ही भक्षक से मिल जाएं, तो गरीब कहाँ जाए?”
गवाहों की मौजूदगी, फिर भी जांच ठप
इस पूरे लेनदेन के दौरान चतुरानंद सिंह और शब्बीर अहमद जैसे गवाह मौजूद थे, जिनके सामने हार सौंपा गया था। इसके बावजूद पुलिस मामले को केवल “लेनदेन का विवाद” बताकर हल्का कर रही है। आरोपी अब भोपाल में बैठकर पीड़ित को धमकियां दे रहा है और पुलिस उसे गिरफ्तार करने या हार बरामद करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
अंतिम चेतावनी : “न्याय नहीं मिला तो करूँगा आत्मदाह”
लगातार मिल रही धमकियों और पत्नी के गहने खो जाने के गम में डूबा इरशाद अब टूट चुका है। उसने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसकी मेहनत की कमाई का सोना उसे वापस नहीं दिलाया गया और सूदखोर पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उसके पास जीवन लीला समाप्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी धनपुरी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की होगी।