जय अंबे कंपनी में ‘हल्ला बोल’, एचपीसी वेतनमान की अनदेखी पर भड़के श्रमिक, काम बंद कर शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल

0
शहडोल।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड  के सोहागपुर एरिया अंतर्गत संचालित रामपुर बटुरा ओसीएम  में कोयला और ओवर बर्डन  उत्खनन का कार्य कर रही निजी ठेका कंपनी ‘जय अंबे’ के खिलाफ श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। वेतन विसंगतियों, सुरक्षा उपकरणों के अभाव और अधिकारियों के तानाशाही पूर्ण रवैये से त्रस्त होकर सैकड़ों कर्मचारियों ने कार्य का बहिष्कार कर दिया और कंपनी परिसर में ही ‘हल्ला बोल’ कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं।
एचपीसी दरों की अनदेखी: हक की लड़ाई तेज
हड़ताल का मुख्य कारण एचपीसी  द्वारा निर्धारित वेतनमान का न मिलना है। प्रदर्शनकारी श्रमिकों का स्पष्ट आरोप है कि केंद्र सरकार और कोल इंडिया के नियमों के मुताबिक उन्हें उच्च शक्ति समिति  की दरों के आधार पर मानदेय मिलना चाहिए, लेकिन जय अंबे कंपनी इन नियमों को ताक पर रखकर श्रमिकों का शोषण कर रही है।
श्रमिकों ने नारेबाजी करते हुए कहा, “जब नियम स्पष्ट हैं कि कोयला क्षेत्र में कार्यरत कुशल और अकुशल श्रमिकों को एचपीसी दरों के अनुसार भुगतान होना है, तो कंपनी प्रबंधन हमें सामान्य मजदूरी देकर हमारे हक पर डाका क्यों डाल रही है?”
अधिकारी अंशुल पर तानाशाही और दुर्व्यवहार के आरोप
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों का सबसे अधिक आक्रोश कंपनी के स्थानीय अधिकारियों के प्रति देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर कंपनी के अधिकारी अंशुल और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का कहना है कि अंशुल का व्यवहार मजदूरों के प्रति बेहद अमर्यादित और तानाशाही भरा है।

श्रमिकों ने बताया कि जब भी कोई कर्मचारी अपनी जायज मांगों या सुविधाओं की बात करता है, तो उसे डराया-धमकाया जाता है। स्थानीय स्तर पर रसूख और पद की धौंस दिखाकर मजदूरों की आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है। अधिकारियों द्वारा किए जा रहे इस मानसिक उत्पीड़न और बदसलूकी ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसके बाद कर्मचारियों ने एकजुट होकर ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।
सुरक्षा ताक पर, ड्यूटी के घंटों का कोई हिसाब नहीं
रामपुर बटुरा में उत्खनन जैसे जोखिम भरे कार्य में लगे इन श्रमिकों के पास बुनियादी सुरक्षा उपकरण  तक उपलब्ध नहीं हैं। नियमों के विपरीत, कंपनी कर्मचारियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों के गहरी खदानों में काम करने को मजबूर कर रही है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
यही नहीं, श्रमिकों ने ‘ओवर टाइम’ के नाम पर शोषण का भी मुद्दा उठाया। कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे तय घंटों से कहीं अधिक काम लिया जाता है, लेकिन बदले में मिलने वाली सुविधाएं और वेतन शून्य के बराबर है। कंपनी न तो चिकित्सा सुविधा दे रही है और न ही कार्यस्थल पर अन्य अनिवार्य संसाधन मुहैया करा रही है।
मुर्दाबाद के नारों से गूंजा खदान क्षेत्र
हाथों में बैनर-पोस्टर लिए और ‘हमारी मांगें पूरी करो’ व ‘जय अंबे प्रबंधन मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए कर्मचारियों ने खदान के काम को पूरी तरह ठप कर दिया है। रामपुर बटुरा क्षेत्र में इस हड़ताल से कोयला उत्खनन का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे प्रतिदिन लाखों के राजस्व का नुकसान होने की संभावना है।
कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक एचपीसी दरों के अनुसार वेतन विसंगति दूर नहीं की जाती, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते और दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह हड़ताल समाप्त नहीं होगी। फिलहाल, जय अंबे कंपनी के आला अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि एसईसीएल प्रबंधन भी इस विवाद को सुलझाने में अब तक नाकाम नजर आ रहा है।
अब देखना होगा कि क्या सोहागपुर एरिया का प्रबंधन और श्रम विभाग इन मजदूरों की जायज मांगों पर संज्ञान लेता है, या फिर ‘जय अंबे’ जैसी निजी कंपनियां नियमों को कुचलकर अपना मुनाफा कमाती रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed