रफ्तार का कहर: मासूम की सांसों पर संकट, देवदूत ने बचाई सुदूर गांव के लाडले की जान

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शहडोल। बेकाबू रफ्तार ने न सिर्फ पांच साल के मासूम को लहूलुहान कर आईसीयू के बिस्तर पर धकेल दिया, बल्कि एक गरीब मां की गोद सूनी करने की भी पूरी साजिश रच दी थी। नानी के आंगन में चहकने आया मासूम जनार्दन आज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। यह कहानी सिर्फ एक सड़क हादसे की नहीं है, बल्कि एक लाचार परिवार के आंसुओं, महंगे इलाज की लाचारी और उस इंसानियत की है जिसने इस बुझते चिराग को अपनी रगों का खून देकर फिर से रोशन कर दिया।
नानी के घर आई खुशियां बिखरीं
सीधी जिले के सुदूर ग्रामीण अंचल पहड़िया में रहने वाले बुजुर्ग श्यामसुंदर भूर्तिया के घर खुशियों का माहौल था। मुंबई में मजदूरी करने वाले दामाद का 5 वर्षीय बेटा जनार्दन अपनी मां अंजना के साथ नानी के घर छुट्टियां बिताने आया था। मुंबई के स्कूल में पढ़ने वाला यह मासूम अपनी तोतली आवाज से पूरे घर में चहक रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, चंद दिनों का यह ननिहाल का सफर एक कभी न भूलने वाले खौफनाक मंजर में तब्दील हो गया।
मां का रो-रोकर बुरा हाल
बीती 18 जून की सुबह जब मासूम जनार्दन घर के सामने बेफिक्र होकर खेल रहा था, तभी व्यौहारी रोड की तरफ से यमदूत बनकर आए एक तेज रफ्तार ट्रक (KA 01 AT 2595) ने उसे बेरहमी से कुचल दिया और चालक वाहन लेकर भाग निकला। चीख-पुकार के बीच जब मां अंजना दौड़कर बाहर आई, तो कलेजे के टुकड़े को खून से लथपथ तड़पता देख उसकी रूह कांप गई। सिर और पैर से बहते खून को देख मां का रो-रोकर बुरा हाल है, उसकी आंखें पथरा गई हैं।
लाचारी और महंगे इलाज का दंश
सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का यह बेहद गरीब परिवार अब शहडोल के आदित्य हॉस्पिटल के आईसीयू के बाहर दाने-दाने को मोहताज है। मुंबई में दिन-रात पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी कमाने वाले पिता के पास इतने महंगे इलाज के पैसे नहीं हैं। अस्पताल के भारी-भरकम खर्च और आईसीयू के डर ने परिवार को भीतर से तोड़ दिया है। जो मां-बाप कल तक अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रहे थे, आज वे अस्पताल के गलियारे में बिलख रहे हैं।
जब देवदूत बनकर आए रक्तदाता
मासूम के शरीर से इतना खून बह चुका था कि डॉक्टरों को लगातार रक्त चढ़ाना पड़ रहा था। बेबस पिता ने खून दिया, फिर मामा ने अपनी रगों का लहू निकाला। जब बात नहीं बनी, तो तंगी से जूझते परिवार ने पाई-पाई जोड़कर 4500 रुपए में महज एमएल खून खरीदा। इस बीच जब सोशल मीडिया पर मासूम की जिंदगी के लिए A+ ब्लड की मार्मिक गुहार लगी, तो धनपुरी निवासी विष्णुकान्त शुक्ला की इंसानियत जाग उठी। वे जिला अस्पताल पहुंचे और निस्वार्थ भाव से रक्तदान किया, जिससे मासूम को नई जिंदगी मिली।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
इस खौफनाक हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई है कि दुर्घटना कारित कर भागने वाले निर्दयी चालक पर कड़ी से कड़ी धाराएं लगाई जाएं ताकि उन्हें न्याय मिल सके। इधर, मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा नियमानुसार सामान्य व त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 23 जून को ही न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया। हालांकि, कानूनी दांव-पेंच और वर्तमान व्यवस्था के तहत वाहन और चालक दोनों को जमानत मिल गई, जिससे इस लाचार परिवार का दर्द और बढ़ गया है।

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