शहडोल शिक्षा विभाग में पेंट घोटाला बना राष्ट्रीय मुद्दा

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भाजपा विधायक शरद कोल ने उठाया विधानसभा में सवाल, जल्द बड़े खुलासे के संकेत

शहडोल। जिले में शिक्षा विभाग में सामने आया बहुचर्चित ‘पेंट घोटाला’ अब तूल पकड़ चुका है। यह मामला अब प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। करोड़ों की शिक्षा राशि में हुई लूट और बच्चों के अधिकारों की अनदेखी ने शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक शरद जुगलाल कोल ने इस पूरे प्रकरण को न केवल गंभीरता से लिया है, बल्कि इसे विधानसभा में तारांकित प्रश्न के रूप में भी उठाया है। विधायक ने न केवल पेंट घोटाले की जांच की मांग की, बल्कि पिछले 10 वर्षों में शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों – जिला शिक्षा अधिकारी, आदिवासी विकास विभाग और जिला शिक्षा केंद्र के माध्यम से खर्च की गई समस्त राशि का ब्योरा मांगा है।
केंद्र व राज्य सरकार की छवि बिगाडऩे की साजिश?
भ्रष्टाचार की इस कड़ी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार की मंशा को झुठलाने की कोशिश की है। विधायक शरद कोल ने स्पष्ट किया है कि सरकार भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति रखती है और अगर कोई भी अधिकारी इसमें दोषी पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। विधायक ने कहा कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है और इसके नाम पर कोई भी लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने विधानसभा में प्रश्न पूछकर साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले को हम अंजाम तक ले जाएंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
विधानसभा में उठाया गया सवाल-पूरी जांच की मांग
1. वित्तीय विवरण – वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक जिले के सभी हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों को कितनी राशि प्राप्त हुई?
2. उपयोग और मरम्मत – इन राशियों से किए गए मरम्मत कार्यों और खरीदी गई सामग्री का विवरण।
3. सत्यापन – इन कार्यों और सामग्री की जांच किन अधिकारियों ने और कब की?
4. भुगतान प्रक्रिया-संबंधित बिल, भुगतान विधि, एजेंसी, आर.टी.जी.एस./चेक/नगद जैसे विवरण मांगे गए हैं।
भ्रष्टाचार का पैटर्न – सिर्फ पेंट नहीं, कई योजनाओं में गोलमाल
केवल पेंट घोटाला ही नहीं, बल्कि इस जांच के जरिए अब अन्य निर्माण, सामग्री खरीदी, और विभिन्न छात्र योजनाओं के अंतर्गत खर्च की गई राशि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि यह भ्रष्टाचार करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है, जो जिले के शिक्षा अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार विभागीय अफसरों की मिलीभगत से किया गया।
भाजपा की मंशा साफ-दोषियों पर गिरेगी गाज
शरद कोल ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार किसी भी सूरत में भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण नहीं देती। यदि इस मामले में किसी भी स्तर के अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर कार्रवाई होगी और जनता को न्याय मिलेगा।
क्या हो सकता है आगे? जल्द होगा बड़ा खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू द्वारा प्रारंभिक जांच शुरू की जा सकती है। अगर विधायक के सवालों का जवाब समय पर नहीं मिला या उत्तर अस्पष्ट रहा, तो यह मामला आगे कोर्ट या हाई लेवल कमेटी तक भी पहुंच सकता है। शिक्षा विभाग में पनपा यह भ्रष्टाचार अब शिक्षा से जुड़ी नीतियों और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता को लेकर एक कठोर परीक्षण साबित हो सकता है। भाजपा विधायक शरद कोल की पहल ने यह दिखा दिया है कि सरकार जवाबदेही से नहीं भागेगी। आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण में कई नाम सामने आ सकते हैं और एक बड़ा प्रशासनिक खुलासा होने की पूरी संभावना है।

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