शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों के हित में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।

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पेण्ड्रा गौरेला मरवाही / सर्व शिक्षक संगठन, जिला गौरेला पेण्ड्रा मरवाही के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बुधवार को छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों के हित में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।

 

सर्व शिक्षक संगठन ने ज्ञापन में उल्लेखित किया है कि, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर, 2025 को निर्णय दिया है कि, 5 वर्ष से अधिक सेवाकाल वाले सरकारी स्कूल के सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य होगा। जिसके बाद प्राथमिक और माध्यमिक शाला में अध्यापन कराने वाले शिक्षक टीईटी पास करने को लेकर मानसिक तनाव की स्थिति में आ गए हैं। क्योंकि इस आदेश से शिक्षकों को नौकरी और पदोन्नति खतरे में दिखने लगी है। इन शिक्षकों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की गई है।

 

ज्ञापन में बताया गया है कि, सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त फैसले का असर 2011 से पहले नियुक्त हुए राज्य के 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों पर पड़ेगा। यदि यह फैसला मौजूदा रूप में लागू किया गया तो बड़े पैमाने पर अनिवार्य सेवानिवृत्तियाँ होंगी और राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी हो जाएगी। 

 

राज्य शासन द्वारा पुनर्विचार याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में मांग की जाए कि, टेट की न्यूनतम योग्यता की शर्तें केवल नई नियुक्तियों पर लागू होनी चाहिए। पहले से कार्यरत शिक्षक जिन सेवा शर्तों और तत्कालीन समय में प्रभावी नियम की पात्रतानुसार भर्ती हुए थे, उन शिक्षकों पर तत्कालीन समय के ही भर्ती और पात्रता नियम लागू रहने चाहिए। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट का आदेश तत्कालीन समय में विधिवत नियुक्त शिक्षकों में असमान परेशानी उत्पन्न करने वाला है और शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता को खतरे में डालता है।

 

ज्ञापन में मांग किया गया है कि, छत्तीसगढ़ राज्य में पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के आजीविका और सेवा अधिकारों की रक्षा करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में उत्पन्न हुई मानसिक तनाव की स्थिति से शिक्षकों को उबारने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों को राहत दिलाया जाए।

 

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक डॉ. संजय शर्मा, महासचिव आकाश राय, कर्मचारी अधिकारी महासंघ के जिला संयोजक सुरेंद्र सिंह, महासचिव सत्य नारायण जायसवाल, टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मुकेश कोरी, अनुसूचित क्षेत्र अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव पीयूष गुप्ता, ट्राईबल एजुकेशन संघ प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम कोशले, संयुक्त शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष तबरेज खान, ब्लाक अध्यक्ष योगेश नायक, कर्मचारी कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश रैदास, सहायक शिक्षक फेडरेशन के जिला महासचिव अजय चौधरी, ब्लाक अध्यक्ष ओमप्रकाश सोनवानी, शिक्षक कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष मनोज तिवारी, बलराम तिवारी, प्रशांत शर्मा, महेंद्र मिश्रा, परसराम चौधरी, आशीष शर्मा, रणजीत सिंह राठौर, जय कुमार त्रिपाठी, राकेश तिवारी, संजय गुप्ता, सत्येन्द्र सिंह, सुजीत रात्रे, सत्येंद्र तिवारी, शंकर राठौर, सुपेद सिंह मराबी, विशाल सिंह ठाकुर, गुलाब बंजारे, कैलाश रोहिणी, अजय कश्यप, मनीष कुमार इत्यादि उपस्थित थे।

 

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thakur Ghanshyam Singh.

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