8 साल की शिवांजली की मौत नहीं, सिस्टम की हत्या है यातायात और परिवहन विभाग की लापरवाही आई कठघरे में
8 साल की शिवांजली की मौत नहीं, सिस्टम की हत्या है यातायात और परिवहन विभाग की लापरवाही आई कठघरे में
एक 8 साल की बच्ची की मौत केवल एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि यह यातायात और परिवहन व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। सवाल यह नहीं कि ऑटो तेज़ क्यों था, सवाल यह है कि ऐसा ऑटो चल ही क्यों रहा था? आज शहर की सड़कों पर सैकड़ों ऑटो ऐसे दौड़ रहे हैं जिनके पास न फिटनेस प्रमाणपत्र है,न वैध परमिट,न चालक के पास स्थाई लाइसेंस, और न ही बच्चों की सुरक्षा के न्यूनतम मानक।
यह हादसा सीधे-सीधे आरटीओ, यातायात पुलिस और नगर प्रशासन की जिम्मेदारी तय करता है। यदि परिवहन विभाग और यातायात पुलिस संयुक्त अभियान चलाएं, तो आधे से अधिक ऑटो तत्काल सड़क से हटाए जा सकते हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावटी चेकिंग होती है।
कटनी।। तेज़ रफ़्तार ऑटो से गिरकर 8 वर्षीय मासूम शिवांजली यादव की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि यातायात विभाग और परिवहन (RTO) विभाग की घोर लापरवाही का परिणाम है। यह हादसा उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जो रोज़ शहर की सड़कों पर बिना दस्तावेज, बिना सुरक्षा और बिना नियंत्रण के ऑटो दौड़ने देती है।
गल्ला मंडी कुठला निवासी 8 वर्षीय शिवांजली रोज़ की तरह कृष्णा वैली स्कूल जाने के लिए ऑटो में सवार हुई थी। रेलवे फाटक ब्रिज के पास तेज़ रफ़्तार और लापरवाही के चलते ऑटो अनियंत्रित हुआ और बच्ची नीचे गिर गई। सिर और सीने में गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई।
सवाल सीधे विभागों से सबसे बड़ा सवाल यह है कि
यह ऑटो सड़क पर चल ही कैसे रहा था? क्या इसकी फिटनेस जांची गई थी? क्या चालक के पास वैध लाइसेंस था? क्या यह स्कूल बच्चों को ढोने के लिए अधिकृत था? इन सभी सवालों के जवाब यातायात पुलिस और आरटीओ विभाग को देने होंगे।
कार्रवाई सिर्फ दिखावे की-परिजन
मृत बच्ची के नाना भगवत प्रसाद यादव ने कहा कि
ऑटो में न जाली थी, न कोई सुरक्षा इंतज़ाम। रोज़ यही ऑटो बच्चों को ढोता था, लेकिन किसी अधिकारी ने कभी नहीं रोका। अगर आरटीओ और यातायात विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो आज मेरी नातिन ज़िंदा होती। परिजनों का आरोप है कि शहर में बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना स्थाई लाइसेंस के ऑटो खुलेआम चल रहे हैं, लेकिन विभाग आंख मूंदे बैठा है।
चेकिंग सिर्फ शराब तक सीमित
परिजनों ने तीखा सवाल उठाया कि शाम होते ही यातायात विभाग शराब जांच मशीन लेकर सड़कों पर दिखता है,लेकिन स्कूल ऑटो, बच्चों की सुरक्षा और अवैध वाहनों की जांच नदारद रहती है। अगर यातायात और परिवहन विभाग संयुक्त जांच अभियान चलाएं, तो सच्चाई सामने आ जाएगी कि शहर में कितने ऑटो पूरी तरह अवैध हैं।
जब विभाग सोते हैं, तब मासूम मरते हैं
शिवांजली की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे शहर में कानून नहीं, लापरवाही दौड़ रही है। यातायात विभाग और परिवहन विभाग की भूमिका अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को ढोने वाले वाहनों के लिए नियम हैं, गाइडलाइन हैं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं लेकिन अमल शून्य है।यह हादसा बताता है कि आरटीओ ने फिटनेस और परमिट पर आंखें मूंदी,यातायात पुलिस ने तेज़ रफ़्तार और क्षमता से अधिक सवारी पर कोई रोक नहीं लगाई और नतीजा एक मासूम की मौत के रूप में सामने आया। अब सवाल यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ, सवाल यह है कि कब तक यातायात और परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी से भागते रहेंगे?
परिजनों ने प्रशासन से मांग कि है कि स्कूल वाहनों के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। बिना जाली, बिना फिटनेस वाले ऑटो तुरंत ज़ब्त हों। तेज़ रफ़्तार ऑटो चालकों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण हो। शहर में ऑटो स्पीड कंट्रोल प्लान लागू किया जाए। हादसे में जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाए। शिवांजली की मौत प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। यदि अब भी सख्त निर्णय नहीं लिए गए, तो अगला शिकार कोई और मासूम होगा। कानून केवल किताबों में नहीं, सड़कों पर दिखना चाहिए।