चार विश्वविद्यालयों की परीक्षा, छात्रों की पढ़ाई ठप; अतिथि विद्वानों की उधारी से बढ़ा संकट
परीक्षा केंद्रों के बोझ तले दबा शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, अतिथि विद्वानों की ‘उधारी’ से आदर्श कॉलेज में लटका ताला
एक ही संस्थान में चार-चार विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं का जिम्मा, छात्रों की पढ़ाई ठप
प्रभारी प्राचार्य के मनमाने रवैये से उच्च शिक्षा विभाग के दावों की खुली पोल
उमरिया/शहडोल।
संभाग के जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा का माहौल तैयार करने के राज्य शासन के दावों को स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मनमानी और लचर कार्यशैली पलीता लगा रही है। ताजा मामला शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय उमरिया का है, जो इन दिनों भारी अव्यवस्थाओं और परीक्षाओं के अत्यधिक बोझ तले दबा हुआ है।
स्टाफ की कमी, फिर भी ले लिया एक और परीक्षा का ठेका
उत्कृष्ट महाविद्यालय उमरिया में पहले से ही पंडित एस.एन.एस. यूनिवर्सिटी शहडोल (प्रथम वर्ष) और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) रीवा (तृतीय वर्ष) की परीक्षाओं का केंद्र बना हुआ है। सीमित स्टाफ और संसाधनों के बावजूद, कॉलेज प्रबंधन ने अपनी सीमाओं को दरकिनार करते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कंप्यूटर पाठ्यक्रम की परीक्षा का केंद्र भी अपने यहाँ ले लिया।
हैरानी की बात यह है कि इस समय महाविद्यालय में द्वितीय वर्ष की नियमित कक्षाएं संचालित होनी चाहिए, लेकिन एक साथ इतनी परीक्षाओं का केंद्र बन जाने से संस्था में अध्यापन कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। छात्रों का कहना है कि जब प्राचार्य को पहले से पता था कि उनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है, तो उन्होंने इस अतिरिक्त परीक्षा केंद्र की स्वीकृति क्यों दी? इस फैसले से छात्र-छात्राओं के भविष्य और उनकी पढ़ाई पर सीधा और बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
आदर्श कॉलेज से ‘उधार’ लिए 10 अतिथि विद्वान, वहां के विभागों में लटका ताला
इस अव्यवस्था को छुपाने के लिए शासकीय आदर्श महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य नियाज अंसारी ने एक और विवादित फैसला ले लिया। अपनी खास कार्यशैली और शासकीय आदेशों की अवहेलना के लिए चर्चित प्रभारी प्राचार्य ने अपने महाविद्यालय से 10 अतिथि विद्वानों को उत्कृष्ट महाविद्यालय ड्यूटी पर भेज दिया।
इस अदूरदर्शी निर्णय का खामियाजा आदर्श महाविद्यालय के छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। वहां की अध्यापन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आलम यह है कि स्टाफ की कमी के कारण कॉलेज के कतिपय विभागों में ताले लटके हुए हैं।
विवादों से पुराना नाता है प्रभारी प्राचार्य का
यह पहला मौका नहीं है जब प्रभारी प्राचार्य नियाज अंसारी अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में हैं। इसके पूर्व भी वे उच्च शिक्षा आयुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक बाबू को कार्यमुक्त न करने के मामले में काफी चर्चा में रहे हैं। इतना ही नहीं, इन्हीं के कार्यकाल में कॉलेज परिसर के भीतर प्राध्यापक और बाबू के बीच हुई हाथापाई का मामला पुलिस थाने तक जा पहुंचा था।
शासकीय प्रयासों को लग रहा पलीता
एक ओर जहां मध्य प्रदेश सरकार जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों का मनमाना रवैया और आपसी सांठगांठ सरकारी प्रयासों को धता बता रही है। क्षेत्र के सजग नागरिकों और छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच करने और शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने
की मांग की है।