एमजीएम हॉस्पिटल पर बंधक बनाने के गंभीर आरोप, कर्मचारियों को घंटों रखा कैद 15 लाख की हेराफेरी के शक में अस्पताल प्रबंधन पर गैरकानूनी कार्रवाई का आरोप, परिजन पहुँचे एसपी ऑफिस- लगा गंभीर आरोप

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एमजीएम हॉस्पिटल पर बंधक बनाने के गंभीर आरोप, कर्मचारियों को घंटों रखा कैद
15 लाख की हेराफेरी के शक में अस्पताल प्रबंधन पर गैरकानूनी कार्रवाई का आरोप, परिजन पहुँचे एसपी ऑफिस- लगा गंभीर आरोप
कटनी।। शहर से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। एमजीएम हॉस्पिटल प्रबंधन पर अपने ही कर्मचारियों को घंटों बंधक बनाकर रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित युवक के परिजन अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँच गए हैं और न्याय की गुहार लगाई है। कटनी के एमजीएम हॉस्पिटल के संचालक और मैनेजर पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अस्पताल में काम करने वाले एक युवक पर 15 लाख रुपये की हेराफेरी का शक जताते हुए अस्पताल प्रबंधन ने कई कर्मचारियों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा।
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों को एक कमरे में बंद कर उनसे पूछताछ की गई और उन पर मानसिक दबाव बनाया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर कोई संदेह था तो मामला बातचीत या कानूनी तरीके से सुलझाया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय गैरकानूनी रास्ता अपनाया गया। युवक के परिजनों का आरोप है कि कर्मचारियों को डराया-धमकाया गया, उनके साथ मानसिक प्रताड़ना की गई और जबरन स्वीकारोक्ति का दबाव बनाया गया। इसी से आहत होकर पीड़ित युवक के परिजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध मे प्राप्त जानकारी अनुसार बरही थाना क्षेत्र के ग्राम मोहनी निवासी बालकिशन पटेल ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वह पिछले आठ वर्षों से एमजीएम अस्पताल के मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं। बालकिशन का आरोप है कि अस्पताल के संचालक दीपक गुप्ता और मैनेजर संजय तिवारी ने उन पर और उनके तीन अन्य साथियों यशवंत पटेल, राहुल पटेल तथा राहुल रजक पर 60 लाख रुपए की चोरी का झूठा आरोप लगाया है। पीड़ित बालकिशन के अनुसार, उन्हें 23 दिसंबर की दोपहर से 24 दिसंबर की रात 11 बजे तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान प्रबंधन द्वारा उन पर 15-15 लाख रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा था। जब बालकिशन के रिश्तेदारों ने डर के कारण मकान की रजिस्ट्री अस्पताल प्रबंधन को सौंप दी, तब जाकर उन्हें रिहा किया गया। बालकिशन ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल स्टोर में एक रुपए के सामान का फर्जी बिल 25,000 रुपए तक बनाया जाता था। जब उन्होंने इस धांधली का विरोध किया, तो उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई और चोरी का झूठा इल्जाम लगा दिया गया। बालकिशन पटेल ने कहा, “मुझ पर और मेरे साथियों पर 15-15 लाख रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है। मेरी जमीन की रजिस्ट्री भी उन्होंने अपने कब्जे में ले ली है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं और मुझे फंसाया जा रहा है।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल बड़ा सवाल यही है —क्या कोई निजी अस्पताल कानून से ऊपर हो सकता है? और क्या किसी भी सूरत में कर्मचारियों को बंधक बनाना जायज़ है? अगर यही अपराध कोई आम नागरिक करता, तो क्या पुलिस अब तक कार्रवाई न करती? जांच जारी है… लेकिन जवाब पूरे शहर को चाहिए।

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