न पानी पूरा, न राहत जलकर बना जनता पर बोझ,24 घंटे पानी’ का दावा फेल, डेढ़ घंटे की सप्लाई, 234 रुपये शुल्क और ऊपर से चक्रवृद्धि ब्याज-नगर निगम पर गंभीर आरोप
न पानी पूरा, न राहत जलकर बना जनता पर बोझ,24 घंटे पानी’ का दावा फेल, डेढ़ घंटे की सप्लाई, 234 रुपये शुल्क और ऊपर से चक्रवृद्धि ब्याज-नगर निगम पर गंभीर आरोप
नगर निगम द्वारा जलकर वसूली की नीति पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के नागरिकों से 24 घंटे जल आपूर्ति के नाम पर 234 रुपये प्रतिमाह वसूले जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत में कई इलाकों में महज डेढ़ घंटे पानी मिल पा रहा है। प्रदेश के अन्य नगर निगमों की तुलना में कटनी में जलकर अधिक होने के साथ-साथ चक्रवृद्धि ब्याज और अतिरिक्त अधिभार ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है।
कटनी।। मध्यप्रदेश के कटनी नगर निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था अब राष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में है। शहर में जहां नागरिकों को 24 घंटे पानी सप्लाई का दावा किया जा रहा है, वहीं हकीकत यह है कि कई वार्डों में डेढ़ घंटे से भी कम समय तक पानी पहुंच रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अधूरी सुविधा के बावजूद नागरिकों से 234 रुपये मासिक जलकर वसूला जा रहा है, जबकि प्रदेश के अन्य नगर निगमों में 12 घंटे पानी के लिए केवल 170 रुपये लिए जा रहे हैं।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता इंद्र मिश्रा का आरोप है कि यदि कोई उपभोक्ता आर्थिक मजबूरी के चलते समय पर जलकर जमा नहीं कर पाता, तो नगर निगम उस पर चक्रवृद्धि ब्याज और भारी पेनल्टी लगाकर वसूली करता है,जो पानी जैसी मूलभूत जरूरत पर सीधा अन्याय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक द्वारा अधिभार समाप्त करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद, अब तक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या प्रशासन जनता की परेशानी को नजरअंदाज कर रहा है? यह सवाल अब कटनी से निकलकर पूरे प्रदेश में गूंजने लगा है।
इस मामले में नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक द्वारा 26 दिसंबर 2025 को आयुक्त को पत्र लिखकर अधिरोपित अधिभार समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे निगम परिषद का समर्थन भी प्राप्त था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जल जैसी बुनियादी सुविधा पर अतिरिक्त कर और ब्याज को लेकर शहरवासियों में रोष व्याप्त है। जनता अब प्रशासन से तत्काल राहत की मांग कर रही है।
पत्र में उल्लेख है कि—अन्य नगर निगमों में ऐसा अधिभार नहीं लगाया जाता निगम परिषद की सामान्य सभा में भी इस अतिरिक्त अधिभार को समाप्त करने का समर्थन हुआ इसके बावजूद आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

जनता में बढ़ता आक्रोश, प्रशासन की चुप्पी नतीजतन, कटनी के वार्डवासी आज भी चक्रवृद्धि ब्याज की मार झेलने को मजबूर हैं। पानी जैसी बुनियादी सुविधा पर अतिरिक्त कर और ब्याज को लेकर जनता में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम अध्यक्ष स्वयं इस अधिभार को हटाने के निर्देश दे चुके हैं, तो अधिकारी क्यों टालमटोल कर रहे हैं? जनहित में आवश्यक है तत्काल निर्णय जलकर पर लगाए जा रहे अधिरोपित अधिभार या चक्रवृद्धि ब्याज को समाप्त करना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आम नागरिकों को राहत देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। सवाल यह भी उठता है क्या अधिकारियों की निष्क्रियता जानबूझकर है? क्या जनता से अवैध वसूली जारी रखने का दबाव है? और क्या जल जैसी मूलभूत सेवा अब केवल राजस्व कमाने का जरिया बन चुकी है?पानी जैसी जीवन-आवश्यक सेवा पर इस प्रकार का ब्याज निर्धारण आम जनता के लिए मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना बन चुका है।