जनता की पीड़ा के आगे छोटी पड़ गई कुर्सी, दिव्यांग से मिलने खुद पहुंचीं महापौर जनसेवा का सजीव दृश्य बना जनसुनवाई जब पद नहीं, मानवता बोली जनसुनवाई में दिव्यांग महिला की पीड़ा सुनने स्वयं नीचे पहुंचीं महापौर, मौके पर ही अधिकारियों को दिए समाधान के निर्देश
जनता की पीड़ा के आगे छोटी पड़ गई कुर्सी, दिव्यांग से मिलने खुद पहुंचीं महापौर जनसेवा का सजीव दृश्य बना जनसुनवाई जब पद नहीं, मानवता बोली
जनसुनवाई में दिव्यांग महिला की पीड़ा सुनने स्वयं नीचे पहुंचीं महापौर, मौके पर ही अधिकारियों को दिए समाधान के निर्देश
कटनी।। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से होती है। मंगलवार को नगर निगम में आयोजित महापौर जनसुनवाई में ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब एक दिव्यांग महिला की पीड़ा सुनने के लिए महापौर स्वयं अपनी कुर्सी छोड़कर उसके पास पहुंच गईं। नगर निगम के मेयर इन काउंसिल सभागार में जनसुनवाई चल रही थी। इसी दौरान जानकारी मिली कि पहरुआ गल्ला मंडी पन्नी कॉलोनी निवासी अनुपमा मिश्रा, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, अपनी समस्याओं को लेकर जनसुनवाई में पहुंची हैं। जैसे ही यह जानकारी महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी तक पहुंची, उन्होंने बिना देर किए अपनी कुर्सी छोड़ दी और सभागार से बाहर निकलकर स्वयं नीचे पहुंचीं।
महापौर ने दिव्यांग महिला से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। अनुपमा मिश्रा ने अपनी विकलांगता पेंशन, राशन की गल्ला पर्ची और संबल कार्ड से जुड़ी परेशानियों की जानकारी दी। महापौर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को बुलाकर इन समस्याओं के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान उपस्थित लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायी था। एक जनप्रतिनिधि का अपनी कुर्सी छोड़कर सीधे एक दिव्यांग नागरिक के पास जाकर उसकी पीड़ा सुनना यह दर्शाता है कि सेवा का असली अर्थ केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी भी है।
दरअसल, नगर निगम में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली यह महापौर जनसुनवाई नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल है। इसमें स्वच्छता, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण सहित नगर निगम से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर आवेदन प्राप्त किए जाते हैं। महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मंगलवार को सामने आया यह दृश्य केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि लोकतंत्र में कुर्सी का महत्व तभी है जब उसके साथ मानवता और सेवा का भाव भी जुड़ा हो। क्योंकि अंततः जनता की पीड़ा को समझना और उसे दूर करना ही किसी भी जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है।समाज को भी ऐसे उदाहरणों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशील हों और व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण हो, तो शासन और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत होता है। क्योंकि अंततः लोकतंत्र की असली ताकत यही है,जहाँ कुर्सी से बड़ी जनता होती है, और पद से बड़ी मानवता।