छोटे तालाब, बड़ी समृद्धि” -जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति की उल्लेखनीय उपलब्धि*

0

फैज मोहम्मद कोरबा जिला रिपोर्टर

 

 

कोरबा विकासखंड करतला के ग्राम उमरेली स्थित जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति मर्यादित ने यह सिद्ध किया है कि यदि सही योजना, संसाधनों का कुशल उपयोग और मेहनत एक साथ हों, तो ग्रामीण आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। समिति ने अपने ग्राम पंचायत के सिंघरी तालाब, पुरैनहा तालाब, घेसरा डबरी और डबरी तालाब जिनका कुल रकबा 8.972 हेक्टेयर है, को 10 वर्ष के लिए लीज पर लेकर मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया।

समिति को मत्स्य पालन विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज अंगुलिका, मत्स्याखेट के लिए जाल और मत्स्य विक्रय हेतु आइस बॉक्स प्रदाय किए गए, जिससे इनके कार्य को गति मिली और उत्पादन क्षमता बढ़ी। समिति की विशेषता यह है कि वे हर तालाब का उपयोग उसके सर्वश्रेष्ठ तरीके से कर रही है। एक तालाब को नर्सरी के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि अन्य तालाबों में फसल विविधीकरण अपनाते हुए मछली पालन किया जा रहा है। यहाँ कतला, रोहू, मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, चिताला, पंगास और रूपचंद जैसी विभिन्न प्रजातियों का पालन किया जा रहा है।

समिति के सदस्य स्वयं मत्स्याखेट करते हैं और मछलियों को सीधे हाट-बाजार में विक्रय करते हैं। बिचौलियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें मछलियों का अधिक मूल्य प्राप्त होता है और आमदनी में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में समिति को प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है, जिससे सभी 25 सदस्य लाभान्वित हो रहे हैं।

पंचायत के छोटे-छोटे तालाब भी यदि शासन की नीति के अनुसार 10 वर्षीय पट्टे पर लेकर वैज्ञानिक पद्धति से उपयोग किए जाएँ, तो ग्रामीणों को स्थायी और बेहतर आय प्राप्त हो सकती है। जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति वास्तव में शासन की सहकार से समृद्धि योजना का एक प्रेरक और जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed