“नगर पालिका में ‘सभा-पति-राज’ का उदय—पार्षद बाहर, व्यवस्थाएं अंदर ही अंदर बेअसर!”

0

जिले की सबसे धनी नगर पालिका मानी जाने वाली धनपुरी नगर पालिका के एक सभागार की फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। वैसे भी नगर पालिका में बैठकों को लेकर दावे-प्रतिदावे और आरोप-प्रत्यारोप पहले से लगते रहे हैं।
9 अप्रैल को स्वच्छता को लेकर एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें समस्त स्वच्छता कर्मचारी, स्वच्छता निरीक्षक सहित दर्जनों कर्मचारियों को नगर पालिका के सभागार में बैठाकर बैठक ली गई। वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशानुसार ऐसी बैठक का आयोजन होना चाहिए और यह अच्छी बात भी है। जाहिर है कि जब अधिकारियों को वरिष्ठ स्तर से दिशा-निर्देश मिलते हैं, तो उसका उद्देश्य नगर की व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है।


लेकिन धनपुरी नगर पालिका की जो फोटो वायरल हो रही है और उसके साथ सोशल मीडिया में “सभा-पति-राज” कैप्शन भी चल रहा है, उसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। सवाल यह उठता है कि क्या नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों में अब वह क्षमता नहीं रही कि वे ऐसी बैठकों का प्रभावी संचालन कर सकें?
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका में 28 वार्ड हैं और 28 पार्षद, साथ ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी हैं, जो पर्याप्त अनुभव और योग्यता रखते हैं। नगर पालिका अधिनियम के तहत स्वच्छता, जलप्रदाय, लोक निर्माण सहित विभिन्न विभागों के सभापति भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद इस बैठक में कोई भी पार्षद या सभापति मौजूद नहीं था।
ऐसा कैसे हो रहा है? क्या नगर पालिका के जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी भूल चुके हैं? धनपुरी नगर पालिका पहले ही “पति-राज” को लेकर चर्चाओं में रही है, और अब “सभा-पति-राज” का नया मामला सामने आ गया है, जिस पर लोग तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।
इस पूरे मामले पर आपका क्या कहना है? कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed