शादी में जरूर आइए….व्हाट्सएप पर आया शादी का निमंत्रण और उड़ गए 2.27 लाख रुपये,साइबर ठगी का नया तरीका,सक्रिय गिरोह
शादी में जरूर आइए….व्हाट्सएप पर आया शादी का निमंत्रण और उड़ गए 2.27 लाख रुपये,साइबर ठगी का नया तरीका,सक्रिय गिरोह
कटनी।। बदलते दौर में साइबर अपराधी लोगों की भावनाओं और भरोसे को ही हथियार बना रहे हैं। अब शादी का निमंत्रण भी ठगी का जरिया बन चुका है। सामने आए एक मामले ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्हाट्सएप पर आए एक शादी के कार्ड ने फल कारोबारी की कमाई पर सेंध लगा दी और कुछ ही मिनटों में उसके बैंक खाते से 2 लाख 27 हजार रुपये पार हो गए।
जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के सावरकर वार्ड नईबस्ती निवासी फल कारोबारी सोनू गुप्ता के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से शादी का डिजिटल कार्ड भेजा गया। सामान्य निमंत्रण समझकर जैसे ही उन्होंने कार्ड खोला, मोबाइल में एक एपीके फाइल डाउनलोड हो गई। इसके बाद साइबर ठगों ने मोबाइल का एक्सेस हासिल कर बैंक खाते से लाखों रुपये निकाल लिए।
घटना का पता चलते ही पीड़ित ने बैंक ऑफ बड़ौदा और पुलिस से शिकायत की, लेकिन साइबर अपराधियों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। मामले के सामने आने के बाद पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अब शादी के सीजन को नया हथियार बना चुके हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक और सोशल मीडिया के जरिए फर्जी वेडिंग कार्ड भेजकर मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल कराया जाता है। यह मालवेयर मोबाइल की निजी जानकारी, बैंकिंग एप और ओटीपी तक पहुंच बना लेता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों में इस तरह के गिरोह सक्रिय बताए जा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान नंबर से आए डिजिटल कार्ड, लिंक या एपीके फाइल को भूलकर भी डाउनलोड न करें। मोबाइल में APK, PIF या VBS जैसे एक्सटेंशन दिखाई दें तो तुरंत डिलीट कर दें। साथ ही फोन की सुरक्षा सेटिंग और एंटी मालवेयर सिस्टम हमेशा सक्रिय रखें।
ठगी होने पर तुरंत करें ये काम
साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
नजदीकी साइबर सेल या पुलिस थाने में संपर्क करें।
आपात स्थिति में 112 पर सूचना दें।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। एक छोटी सी लापरवाही बैंक खाते को खाली कर सकती है, इसलिए हर अनजान लिंक और डिजिटल कार्ड को संदेह की नजर से देखना अब जरूरी हो गया है।