नगरपालिका में नियमों का ‘हंटर’ चलते ही बैक डोर से रायता फैलाने में जुटे नेता!

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(शुभम तिवारी)
शहडोल। नगरपालिका परिषद  में विकास कार्यों और पेयजल को लेकर फैलाया जा रहा पूरा बखेड़ा महज एक सुनियोजित भ्रम और ‘मीडिया मैनेजमेंट’ का हिस्सा है। सच्चाई यह है कि जब से नई सीएमओ ने कमान संभाली है और भ्रष्टाचार की पुरानी परिपाटी पर नियमों का कड़ा हंटर चलाया है, तब से कुछ रसूखदार नेताओं की सियासी जमीन खिसक गई है। पुराना जुगाड़ फेल होने के बाद अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर्दे के पीछे से ‘बैक डोर’ गेम खेलते-खेलते अचानक फ्रंट फुट पर आकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अपनी कमियों को प्रशासनिक लापरवाही के पीछे छुपाया जा सके।
शहर की जनता सब देख रही है कि किस तरह दिखावे के लिए अध्यक्ष भाजपा का और उपाध्यक्ष कांग्रेस का रोना रोते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ये दोनों किस तरह चुनाव साथ में जीते थे और आज तक हर अंदरूनी काम में दोनों की कैसी अटूट साठगांठ है, यह बात अब किसी से छुपी नहीं है। जब नए सीएमओ ने नियमों के विरुद्ध जाकर ठेकेदारों को अनुचित लाभ देने से साफ इनकार कर दिया, तो ये दोनों नेता बौखला गए। इसके बाद शहडोल से लेकर भोपाल तक की दौड़ लगाई गई, तरह-तरह की शिकायतें करवाई गईं और प्रशासनिक दबाव बनाने के पूरे प्रयास हुए। परंतु, जब भोपाल स्तर से भी इनकी दाल नहीं गली, तो अब मीडिया के माध्यम से जनता में यह झूठ फैलाया जा रहा है कि शहर में पानी का संकट केवल प्रशासनिक उदासीनता के कारण गहराया है।
सोन नदी पर बनने वाले 28 करोड़ के बैराज निर्माण और अन्य प्रोजेक्ट्स को लेकर मचे घमासान के पीछे का सच बेहद दिलचस्प है। खबरों को जिस तरह से तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये नेता खुद ही ठेकेदार हों! वैसे भी शहडोल में बीती पंचवर्षीय में शंभू और कई अन्य ठेकेदारों व नेताओं की जुगलबंदी और उनकी आपसी ठेकेदारी पूरे शहर में पहले से ही जगजाहिर रही है। विवाद की असली वजह यह है कि सीएमओ पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार काम करना चाहती हैं, जबकि नेता चाहते हैं कि पुरानी व्यवस्था की तरह नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को उपकृत किया जाए। जब सीएमओ ने बिना परिषद की उचित सहमति के मनमानी करने वाले टेंडरों पर रोक लगाई, तो तिलमिलाए नेताओं ने इसे ‘कमीशन का खेल’ बताकर खुद का पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में कटघरे में वे मूल भाजपाई नेता भी आ गए हैं, जिन्हें पार्टी ने निष्ठा के आधार पर टिकट दिया था। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि विपक्ष के इस झूठे प्रोपेगैंडा पर मूल भाजपाइयों की रहस्यमयी चुप्पी यह दर्शाती है कि वे भी शायद बहुत कम में ही संतुष्ट हो गए हैं और शहर के वास्तविक विकास की जगह मूकदर्शक बने हुए हैं। प्रशासन का रुख इसमें अत्यंत स्पष्ट और न्यायसंगत है कि जो भी निर्माण कार्य स्वीकृत हुए हैं, वे सभी हर हाल में कराए जाएंगे, लेकिन कोई भी काम नियमों के विरुद्ध जाकर नहीं होगा। पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का काम सुचारू रूप से चल रहा है। ऐसे में यह साफ है कि पेयजल संकट का बहाना बनाकर केवल प्रशासनिक छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे जनता भली-भांति समझ चुकी है।

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