सफाईकर्मियों का फूटा गुस्सा, शहर हुआ राम भरोसे, भ्रष्टाचार की अविनाश गंगा में डूबा शहडोल प्रशासन

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शहडोल। संभागीय मुख्यालय  की नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन की नाक के नीचे गरीबों के आर्थिक दमन और शोषण का खेल चल रहा है, शहर को साफ रखने वाले सफाई कामगारों के पसीने की कमाई को अविनाश एजेंसी नाम की आउटसोर्स कंपनी डकार रही है और जिला प्रशासन व नगर पालिका के हुक्मरान आंखों पर गांधी जी के तीन बंदरों की पट्टी बांधकर बैठे हैं। पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है। बार-बार लिखित चेतावनी और ज्ञापन देने के बावजूद जब बहरे प्रशासनिक अमले की जूं तक नहीं रेंगी, तो शुक्रवार की सुबह आक्रोशित सफाई कर्मचारियों ने नगर पालिका के खिलाफ आर-पार का बिगुल फूंक दिया। आज से पूरे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है।
 मजदूरों को थमाया भीख का झुनझुना!
भारतीय सफाई मजदूर संघ के पत्र क्रमांक 20 में इस फर्जीवाड़े का कच्चा चिठ्ठा खोला गया है, सितंबर 2025 से ठेके पर चल रही इस शोषक एजेंसी ने मार्च और अप्रैल 2026 का पूरा वेतन साफ कर दिया है। दो-दो महीने हाड़-तोड़ काम कराने के बाद इन सफाई कर्मियों को भीख की तरह सिर्फ एक महीने की तनख्वाह थमा दी जाती है। जब भूखे-प्यासे कर्मचारी अपने हक का पैसा मांगते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जाती है।
बायोमेट्रिक की आड़ में तानाशाही, ईपीएफ में हेराफेरी
इस भ्रष्टाचार की परतें यहीं नहीं थमतीं। तकनीकी और तानाशाही रवैया अपनाते हुए कई कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी जबरन बंद कर दी गई है। मतलब, काम पूरा लिया जाएगा लेकिन हाजिरी की लिस्ट से नाम गायब कर वेतन रोक दिया जाएगा! इसके साथ ही, कर्मचारियों के भविष्य निधि  खातों में भी पैसों की भारी हेराफेरी की जा रही है। संघ के नगर मंत्री पवन मोगरे ने बताया कि साप्ताहिक मस्टर एवं अतिरिक्त श्रमिकों के वर्षों पुराने एरियर के भुगतान को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जब  कटनी का नगर निगम एरियर दे चुका है, तो शहडोल प्रशासन इस भ्रष्ट एजेंसी पर इतना मेहरबान क्यों है? क्या मलाई का एक हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है?
जब शहर कचरे का ढेर बनेगा, तब जागेंगे साहब
सफाई मजदूर संघ के पदाधिकारी वाल्मीक कुण्डे और अन्य नेताओं ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इस मामले की गूंज अब दिल्ली में केंद्रीय आयोग की सुमित्रा बाल्मीक  के कार्यालय से लेकर राज्य मंत्रालय और स्थानीय कलेक्टर-एसपी तक पहुंच चुकी है। बड़ा सवाल यह है कि जब मजदूर लगातार ज्ञापन दे रहे थे, तो जिला प्रशासन और मुख्य नगर पालिका अधिकारी किस वीआईपी कोठरी में सो रहे थे? उन्होंने समय रहते इस भ्रष्ट एजेंसी को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया? अब जब सफाई ठप हो चुकी है और पूरा शहर कचरे के ढेर में तब्दील होने की कगार पर है।

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