डीजल सिंडिकेट का पर्दाफाश: CCTV में कैद हुई ड्राइवर की करतूत, फिर भी खाकी खामोश; शहडोल में ट्रांसपोर्टर को लगा लाखों का चूना
शहडोल।अमलाई थाना क्षेत्र में खाकी की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को चूना लगाने वाले एक सुनियोजित डीजल चोरी सिंडिकेट का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां चालक द्वारा अपने ही मालिक के ट्रकों से लाखों रुपये का डीजल चोरी किया जा रहा था। हैरान करने वाली बात यह है कि पूरी चोरी और धांधली के पुख्ता CCTV फुटेज और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिन्होंने चालक के काले कारनामों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। इसके बावजूद अमलाई पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है और कार्रवाई के नाम पर केवल टालमटोल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे CCTV फुटेज और तस्वीरों ने इस पूरे फर्जीवाड़े को जगजाहिर कर दिया है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पेट्रोल पंप पर डीजल भरवाते समय चालाकी से ट्रकों के फ्यूल टैंक के साथ-साथ अलग से लाए गए प्लास्टिक के बड़े-बड़े डिब्बों में भी डीजल भरा जा रहा है। चालक पेट्रोल पंप कर्मियों से साठगांठ कर वाहन मालिक को पूरे टैंक का बिल थमाता था, जबकि एक बड़ा हिस्सा डिब्बों में भरकर अवैध रूप से बेच दिया जाता था। कैमरे की फुटेज से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि यह कोई सामान्य चूक नहीं, बल्कि लंबे समय से बेखौफ अंदाज में चलाया जा रहा चोरी का एक संगठित तंत्र था।
नौरोजाबाद (जिला उमरिया) निवासी पीड़ित वाहन मालिक अब्दुल खान ने बताया कि चालक पिछले कई सालों से लगातार उनके वाहनों में यह कारनामा कर रहा था। चोरी के इस खेल में MP54-ZB-4860, MP18-ZJ-4677, MP20-ZV-4430 समेत कई भारी वाहन शामिल हैं। मालिक को डीजल का पूरा भुगतान करना पड़ता था, जबकि गाड़ियां सड़कों पर कम माइलेज दे रही थीं। जब गहराई से जांच की गई और सीसीटीवी खंगाले गए, तब जाकर इस बड़े वित्तीय नुकसान और बड़े विश्वासघात का खुलासा हुआ।
मामले में पुलिस की सुस्ती और संवेदनहीनता चरम पर नजर आ रही है। पीड़ित द्वारा 31 जुलाई 2026 को अमलाई थाने में पहली लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 3 अगस्त 2026 को दोबारा पुलिस को चोरी के पुख्ता सबूतों के साथ सूचित किया गया, लेकिन थाना स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार परेशान होकर पीड़ित अब्दुल खान ने 7 अगस्त 2026 को सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) शहडोल की चौखट पर दस्तक दी और लिखित आवेदन देकर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की।
जब अपराध CCTV कैमरे में कैद है, संदिग्ध चालक का नाम और चेहरा साफ दिख रहा है, गाड़ियों के नंबर उजागर हैं और वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल होकर सच बयां कर रहे हैं—तब यह सवाल उठना लाजिमी है कि अमलाई पुलिस की आंखें क्यों बंद हैं। केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों के सिद्ध होने के बावजूद आरोपी चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उसे सलाखों के पीछे भेजने में देरी क्यों की जा रही है। क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है या यह महकमे की घोर लापरवाही का नतीजा है।
क्षेत्रीय लोगों और ट्रांसपोर्टरों में पुलिस के इस ढुलमुल रवैये को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि दिन-दहाड़े सीसीटीवी में कैद होने वाली इतनी बड़ी चोरी पर भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी, तो आम जनता और कारोबारियों का कानून व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। यह सिर्फ कुछ लीटर डीजल की चोरी का मामला नहीं है, बल्कि ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के साथ किया गया एक गंभीर और संगठित आर्थिक अपराध है। अब देखना यह होगा कि एसपी शहडोल के हस्तक्षेप के बाद अमलाई पुलिस नींद से जागती है या फिर वायरल वीडियो और सीसीटीवी साक्ष्यों को दरकिनार कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।