स्टाइल के नाम पर शोर नहीं, सड़क पर सुकून जरूरी मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ यातायात पुलिस की सख्ती, मौके पर ही निकलवाए कानफोड़ू साइलेंसर
स्टाइल के नाम पर शोर नहीं, सड़क पर सुकून जरूरी
मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ यातायात पुलिस की सख्ती, मौके पर ही निकलवाए कानफोड़ू साइलेंसर

कटनी।। शहर की सड़कों पर तेज और कर्कश आवाज के साथ दौड़ती बुलेट या अन्य दोपहिया वाहन कई लोगों के लिए महज शोर नहीं, बल्कि परेशानी और असुरक्षा का कारण बनते हैं। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए यातायात पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। पुलिस की कार्रवाई का खास पहलू यह है कि केवल चालान करने तक कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि मौके पर ही अनधिकृत साइलेंसर निकलवाकर वाहन को निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं उप पुलिस अधीक्षक रत्नेश मिश्रा के मार्गदर्शन में यातायात थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप सिंह के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के तहत सोमवार रात करीब 8 बजे चंडाक चौक पर यातायात पुलिस ने बुलेट मोटरसाइकिल में लगा मॉडिफाइड साइलेंसर निकलवाकर वैधानिक कार्रवाई की। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 11 बजे झिंझरी स्थित मारुति शोरूम के पास मॉडिफाइड साइलेंसर की शिकायत मिलने पर यातायात पुलिस मौके पर पहुंची।
जांच के दौरान वाहन में तेज एवं कर्कश आवाज करने वाला साइलेंसर लगा पाया गया। पुलिस ने मौके पर ही साइलेंसर निकलवाया और वाहन चालक के विरुद्ध मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जुर्माने सहित वैधानिक कार्रवाई की।
यातायात पुलिस के अनुसार अब तक दर्जनों मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अनधिकृत साइलेंसर निकलवाने के साथ वाहन चालकों पर नियमानुसार जुर्माना भी लगाया गया है।
आखिर मॉडिफाइड साइलेंसर पर इतनी सख्ती क्यों
यह सवाल महत्वपूर्ण है कि आखिर एक साइलेंसर को लेकर यातायात पुलिस इतना सख्त रुख क्यों अपना रही है। दरअसल, वाहन का साइलेंसर केवल आवाज को कम करने के लिए नहीं होता। वाहन निर्माता द्वारा निर्धारित साइलेंसर वाहन के शोर और उत्सर्जन से जुड़े मानकों को ध्यान में रखकर लगाया जाता है। जब इसे हटाकर तेज आवाज करने वाला मॉडिफाइड साइलेंसर लगाया जाता है तो वाहन की आवाज सामान्य से कहीं अधिक बढ़ सकती है। इसका असर केवल सड़क पर चलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। लगातार तेज और अचानक आने वाली कर्कश आवाज आसपास के लोगों के लिए परेशानी पैदा करती है। बाजार, रिहायशी इलाकों, अस्पतालों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इसका प्रभाव और ज्यादा महसूस होता है। रात के समय ऐसे वाहनों की तेज आवाज लोगों की नींद और सामान्य शांति को भी प्रभावित कर सकती है।

तेज आवाज कई बार बन सकती है सड़क सुरक्षा का भी मुद्दा
मॉडिफाइड साइलेंसर का एक दूसरा पहलू सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा है। तेज आवाज में वाहन चलाना कई युवाओं के लिए स्टाइल या आकर्षण का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाते समय व्यक्तिगत पसंद से ज्यादा महत्वपूर्ण अन्य लोगों की सुविधा और यातायात अनुशासन होता है। खासकर जब कोई वाहन अचानक तेज आवाज करता हुआ गुजरता है तो आसपास मौजूद पैदल यात्रियों, अन्य वाहन चालकों या संवेदनशील लोगों के लिए यह असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं, तेज आवाज के साथ तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने की प्रवृत्ति जुड़ जाए तो जोखिम और बढ़ सकता है।
कार्रवाई का संदेश साफ सड़क निजी प्रदर्शन की जगह नहीं
यातायात पुलिस की मौजूदा कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना व्यक्तिगत प्रदर्शन का माध्यम नहीं है। बाइक का आकर्षक दिखना या उसकी आवाज अलग होना अपनी जगह है, लेकिन यदि इसके लिए वाहन के निर्धारित मानकों से छेड़छाड़ की जाती है और दूसरों को परेशानी होती है तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत एवं अत्यधिक तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे वाहनों की सड़क पर जांच जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर मौके पर कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान की सफलता केवल चालान की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि कितने वाहन चालक दोबारा मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने से बचते हैं। इसलिए पुलिस की कार्रवाई के साथ वाहन चालकों को यह समझाना भी जरूरी है कि कंपनी द्वारा निर्धारित मानकों वाला साइलेंसर ही वाहन में इस्तेमाल करें।
यातायात पुलिस की यह पहल शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ सड़क पर अनुशासन और नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सड़क पर रफ्तार का रोमांच अपनी जगह है, लेकिन दूसरों की शांति की कीमत पर नहीं। स्टाइल के नाम पर कानफोड़ू शोर के बजाय नियमों के अनुरूप वाहन चलाना ही जिम्मेदार चालक की पहचान है।