रक्षाबंधन पर झिंझरी जेल में बंटी खुशियां, मासूम बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान मुस्कान ड्रीम्स समाजसेवी संस्था एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज संगठन ने महिला बंदियों और उनके बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन पर्व
रक्षाबंधन पर झिंझरी जेल में बंटी खुशियां, मासूम बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान
मुस्कान ड्रीम्स समाजसेवी संस्था एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज संगठन ने महिला बंदियों और उनके बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन पर्व

कटनी। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, अपनत्व और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ मुस्कान ड्रीम्स समाजसेवी संस्था एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज संगठन के संयुक्त तत्वावधान में झिंझरी जेल में महिला बंदियों एवं उनके बच्चों के साथ रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम मुस्कान ड्रीम्स समाजसेवी संस्था की चेयरपर्सन एवं संस्थापक समाजसेवी अधिवक्ता मंजूषा गौतम के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। संस्था द्वारा विगत कई वर्षों से जेल में निरुद्ध महिला बंदियों के बच्चों के बीच रक्षाबंधन पर्व मनाकर उन्हें त्योहार की खुशियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर महिला बंदियों और उनके बच्चों को राखियां, रुमाल एवं नए वस्त्र भेंट किए गए। महिलाओं को श्रृंगार सामग्री प्रदान की गई तथा सभी को मिठाई और चॉकलेट खिलाई गई। नए कपड़े, उपहार और मिठाई पाकर मासूम बच्चे खुशी से झूम उठे। उनके चेहरों पर आई मुस्कान ने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक और यादगार बना दिया।
समाजसेवी राजुल मिश्रा, लक्ष्मी द्विवेदी, क्रांति चौबे, ममता गर्ग एवं मंजूषा गौतम ने बच्चों को राखी बांधी। वहीं मंजूषा गौतम ने जेल में मौजूद कैदियों, महिला बंदियों, जेल स्टाफ, जेल प्रभारी प्रभात चतुर्वेदी एवं उपनिरीक्षक अरविंद शाह को भी राखी बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी ममता गर्ग ने किया।
इस अवसर पर मंजूषा गौतम ने कहा कि हम अपने घर-परिवार में रक्षाबंधन पर बच्चों और परिजनों के लिए खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन समाज में एक ऐसा वर्ग भी है जो इन खुशियों से वंचित रह जाता है। जेल में रह रहे बंदी, महिला बंदियां और उनके मासूम बच्चे भी त्योहारों की खुशियों से दूर हो जाते हैं। ऐसे लोगों के बीच जाकर त्योहार मनाना और उनके साथ खुशियां साझा करना समाज के प्रति हमारा दायित्व है।
उन्होंने कहा कि समाजसेवा का उद्देश्य केवल सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद और वंचित लोगों के भीतर अपनापन, विश्वास और सकारात्मक सोच पैदा करना भी है। जेल से बाहर निकलने के बाद ये लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और उनके मन में समाज के प्रति नाराजगी, गुस्सा या नकारात्मक भावना न रहे, इसके लिए मानवीय व्यवहार और सकारात्मक वातावरण बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों और वंचितों के बीच खुशियां बांटने से जो आत्मिक संतोष और आनंद मिलता है, वह समाजसेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में समाजसेवी ममता गर्ग, राजुल मिश्रा, लक्ष्मी द्विवेदी, क्रांति चौबे एवं मंजूषा गौतम सहित अन्य लोगों की उपस्थिति रही। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि त्योहार की असली खुशी तभी है, जब उसकी रोशनी समाज के उन लोगों तक भी पहुंचे, जो किसी कारणवश इन खुशियों से दूर हैं।