RTO शहडोल में ऑपरेटर अरविंद का ‘सिंडिकेट राज’: भदौरिया, अनूप से लेकर अब संतोष की ‘मास्टर की’ बना कर्मचारी, अवैध बस संचालन पर उठा पर्दा
दशक भर से ‘ऑफ रिकॉर्ड RTO’ बनकर चला रहा समानांतर व्यवस्था, पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बाद विभाग में मचा हड़कंप
शहडोल। संभागीय परिवहन सुरक्षा एवं नियमन की जिम्मेदारी संभालने वाला RTO कार्यालय शहडोल इन दिनों भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग में पदस्थ संविदा/कम्प्यूटर ऑपरेटर अरविंद की भूमिका को लेकर सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। आरोप है कि बीते एक दशक से कार्यालय में जिला परिवहन अधिकारी भले बदलते रहे हों—चाहे भदौरिया रहे हों, अनूप रहे हों या अब वर्तमान आरटीओ संतोष हों—लेकिन विभाग की असली ‘मास्टर की’ हमेशा ऑपरेटर अरविंद के पास ही रही। कथित तौर पर ‘ऑफ रिकॉर्ड RTO’ बनकर समानांतर व्यवस्था चला रहे इस कर्मचारी के संरक्षण में जिले भर में अवैध बस संचालन, परमिट की हेराफेरी और शासन के राजस्व को चूना लगाने का खेल खुलेआम जारी है।
इस पूरे मामले की परतें तब खुलीं जब शिकायतकर्ता संजय कुमार त्रिपाठी ने पुलिस अधीक्षक शहडोल सहित थाना सीधी, जैतपुर और पुलिस चौकी झींकबिजुरी को आधिकारिक शिकायत पत्र सौंपकर अरविंद के सिंडिकेट और अवैध बस संचालन पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिकायत के अनुसार, ऑपरेटर अरविंद के कथित संरक्षण के दम पर नियमों को ताक पर रखकर बसें चलाई जा रही हैं। इसमें पहला मामला यात्री वाहन क्रमांक MP 17 P 3168 का है, जिसका परमिट अनूपपुर से कोटड़ी (वाया पसला, पुंगा, केशवाही होकर सीधी) तक स्वीकृत है। इसके बावजूद रसूख के बल पर इस बस को मूल परमिट से इतर करीब 40 किलोमीटर अतिरिक्त मार्ग पर बिना किसी वैध अनुमति के दौड़ाया जा रहा है।
दूसरा गंभीर मामला अंतर्राज्यीय फर्जीवाड़े से जुड़ा है। वाहन क्रमांक CG 31 C 2997, जो छत्तीसगढ़ के पेंड्रा RTO में पंजीकृत है और जिसका परमिट केवल छत्तीसगढ़ सीमा तक सीमित है, वह बेधड़क मध्य प्रदेश की सीमा में घुसकर झींकबिजुरी मार्ग पर संचालित हो रहा है। इस अवैध संचालन से मध्य प्रदेश शासन को लाखों रुपये के टैक्स और राजस्व का सीधा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि जब वैध परमिट धारक (वाहन MP 18 ZJ 6823, केशवाही-जैतपुर मार्ग) इस धांधली का विरोध करते हैं, तो अवैध बसों के चालक-परिचालक न केवल गाली-गलौज और विवाद पर आमादा हो जाते हैं, बल्कि आरटीओ कार्यालय में बैठे अरविंद के नाम की धौंस देते हुए वैध परमिट निरस्त करवाने की खुली धमकी देते हैं।
एक साधारण ऑपरेटर के पास इतनी असीमित शक्तियां और प्रभाव कैसे बना हुआ है, यह पूरे प्रशासनिक अमले पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक दशक से जमे इस ऑपरेटर की कार्यप्रणाली, अधिकारियों के साथ उसकी मिलीभगत और इस अवैध सिंडिकेट की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।