पेंड्रा में “आई कैन चेंज माय लाइफ” मोटिवेशनल सेमिनार का भव्य आयोजन: अमन सर ने दिए सफलता के मूलमंत्र, युवाओं में दिखा उत्साह
पेंड्रा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)
जिले के पेंड्रा स्थित ऑडिटोरियम में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए “आई कैन चेंज माय लाइफ” (I Can Change My Life) नाम से एक दिवसीय भव्य प्रेरणादायक एवं करियर मार्गदर्शन सेमिनार का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों के मन से असफलता का डर व झिझक निकालना, सही लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास का संचार करना था।
मां के त्याग की भावुक कहानी बनी अमन सर के जीवन का ‘ट्रिगर पॉइंट’
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता अमन सर ने अपने जीवन के सबसे बड़े ‘ट्रिगर पॉइंट’ को साझा करते हुए बताया कि वे 12वीं में तीन बार फेल होने के बाद चौथी बार में पास हुए थे। इसके बाद जब वे कॉलेज के प्रथम वर्ष में भी फेल हो गए, तब रात 11 बजे उनकी मां ने उन्हें एक ऐसी बात बताई जिसने उनकी जीवनशैली और सोच को पूरी तरह बदल दिया। मां ने बताया कि पढ़ाई के लिए उन्हें जो ₹2300 दिए गए थे, वे उनकी मां ने अपना मंगलसूत्र बेचकर जुटाए थे।
एक महिला के लिए उसका मंगलसूत्र कितना कीमती होता है, यह समझाते हुए उन्होंने बताया कि मां की इस कुर्बानी ने उन्हें अंदर तक हिला दिया और पूरे सभागार में मौजूद बच्चों की आंखें नम हो गईं। यही भावुक क्षण उनके जीवन का ‘ट्रिगर पॉइंट’ बना, जिसके बाद उन्होंने अपना लक्ष्य तय किया और सफलता की राह पर लगातार आगे बढ़े। अमन सर ने युवाओं से कहा कि हर इंसान के जीवन में कोई न कोई ऐसा ‘ट्रिगर पॉइंट’ जरूर होता है, जो उसे उसके लक्ष्य (गोल्स) हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।
माइंड पावर, वैज्ञानिक सूत्र और ‘लेजर फोकस’ पर जोर
अमन सर ने युवाओं को मोबाइल व सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग से दूर रहने और अनुशासन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने समझाया कि जब व्यक्ति अपनी शारीरिक ऊर्जा, भाषा और ध्यान का सही तालमेल बनाता है, तो मस्तिष्क के ‘प्रीफ्रंटल लोब’ से सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन और एंडोरफिन जैसे सकारात्मक हार्मोन्स स्रावित होते हैं, जो ध्यान को “लेजर फोकस” में बदलकर कार्य क्षमता कई गुना बढ़ाते हैं। इसके विपरीत, नकारात्मक सोच से कॉर्टिसोल जैसे तनाव बढ़ाने वाले हॉर्मोन सक्रिय होते हैं। सत्र के दौरान ‘MIND POWER’ वर्कबुक के जरिए पुरानी नकारात्मक सोच छोड़ सकारात्मक संकल्प लिखने का अभ्यास भी कराया गया।
अतिथियों ने साझा किए अनुभव
मुस्कान जायसवाल (एमबीबीएस छात्रा): कार्यक्रम में शामिल हुईं एमबीबीएस की छात्रा मुस्कान जायसवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों, पारिवारिक परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद सही प्राथमिकताएं तय करने और समय प्रबंधन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
लालजी पड़वार (समन्वयक, फोर्स एकेडमी मजगवां): उन्होंने कहा कि पेंड्रा जैसे क्षेत्र में सफल युवाओं और विशेषज्ञों का सीधा मार्गदर्शन मिलना स्थानीय बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है।
विजय सिंह ठाकुर (सामाजिक कार्यकर्ता, बैकुंठपुर): उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को भटकाव से बचाने के लिए ऐसे सकारात्मक कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।
प्रशासन से नियमित आयोजनों में सहयोग की अपील
कार्यक्रम की सफलता और युवाओं पर पड़े इसके सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए उपस्थित प्रबुद्धजनों, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने एक स्वर में मांग की कि जिला प्रशासन को आगे आकर हर स्कूल व कॉलेज स्तर पर ऐसे प्रेरणादायक सत्रों का आयोजन नियमित रूप से कराना चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को करियर गाइडेंस के लिए बाहर बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।