एक ही थाने में तीन – तीन स्टार_फिर भी यातायात व्यवस्था चौपट..!!
(सचिन माँझी)
उमरिया । एमपी तो अजब है ही लेकिन एमपी का उमरिया गजबे है उमरिया जिले के यातायात थाना में जिले की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने एक या दो नहीं बल्कि तीन तीन तीन स्टार तैनात किए गए हैं ये अलग बात है कि यातायात व्यवस्था सुधरने की बजाए दिन ब दिन बद्तर होती जा रही है।मुख्यालय की पुरी सड़कों पर बेतरतीब खड़े दोपहिया वाहन सड़कों पर लगने वाले ठेले पार्किंग सुविधा न होने के कारण दुकानों के बाहर खड़े चार पहिया वाहन सड़कों पर तीरपाल लगाकर लगी दुकानें किसी भी रूप में यातयात पुलिस के अस्तित्व को ही नकार देती हैं मानो ऐसा कोई विभाग उमरिया में हो ही न।
एक निरीक्षक दो आर आई लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं आई
उमरिया यातायात थाने में निरीक्षक ज्योति शुक्ला आर आई शरद श्रीवास्तव आर आई प्रियंका शर्मा जैसे तीन तीन ,तीन सितारे वाले अधिकारी तैनात हैं इनके अलावा दो उप निरीक्षक चार सहायक उप निरीक्षक आठ हेड कांस्टेबल पांच कांस्टेबल पदस्थ हैं अब आप स्वयं अंदाज लगाइये की छोटे से जिले के छोटे से मुख्यालय में इतनी तैनाती के बाद यातायात थाने के बाहर गांधी चौक में ही यातायात व्यवस्था कितनी चाक चौबंद है। क्या जिलेवासियों ने इन अधिकारियों को वाहन चेकिंग स्थल के अलावा अब तक किसी चौराहे पर कभी देखा है ?
चालान के साथ साथ चलने के लिए भी हो काम
यातायात पुलिस उमरिया द्वारा जिस पूर्ण मनोबल और इच्छा शक्ति से कभी होंडा शोरूम कभी रमपुरी चौक कभी घंघरी तो कभी स्टेशन चौक पर चालानी कार्यवाही निरंतर की जा रही है उसकी आधी इच्छा शक्ति से अगर नगर के यातायात व्यवस्था को सुधारने के प्रयास किए जाते तो बेहतर होता पूर्व कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने जिस पाली रोड को वन वे घोषित किया वह आज भी लागू नहीं हो पाया याद याद आने की बहार और पूरे गांधी चौक में सड़कों पर खड़े चार पहिया वाहन पूरे नगर की यात्रा व्यवस्था की तस्वीर पेश करते हैं त्योहारी सीजन में शहर की सड़कों पर दो पहिया वाहन से भी निकलना दुबर होता जा रहा है दुकानों के बाहर सड़क तक सामान फैला कर दुकानें लगाई जा रही हैं लेकिन यातायात विभाग में तीन तीन तीन स्टार सिर्फ कुर्सियों की शोभा बढ़ा रहे हैं।
सडके हैं या मेला स्थल
जिला मुख्यालय के गांधी चौक से रणविजय चौक होते हुए कालरी स्कूल एवं कागजो में बनी सब्जी मंडी जाने वाली रोड पर एक तरफ से सड़क पर नुकीले खिलो और रस्सी पत्थरों के सहारे बंधे पीले नीले रंग बिरंगे तीरपाल ही त्रिपाल नजर आएंगे अगर नया आदमी कोई उमरिया आए तो वो समझ ही न पाए कि ये जिला मुख्यालय है या मीना बाजार जिसे जहां मर्जी सब्जी की दुकान लगाई जिसे जहां समझ में आया टोकनी , मिट्टी के बर्तन सड़क पर सजा दिए मानो ये कोई सड़क न होकर विशाल मेला ग्रांउड हो और ऊपर से वाहन वाले जबरदस्ती मेला परिसर में वाहनों को लेकर घुस आए हों ।
आज भी मुख्यालय में स्थाई सब्जी मंडी नहीं
बीते 10 अगस्त को नगर पालिका ने अपनी 107 वी वर्षगांठ गौरव दिवस के रूप में मनाई कितने गौरव का विषय है पूरी शताब्दी बीत गई लेकिन नगर को एक स्थाई सब्जी मंडी भी नहीं मिल सकी पूरे नगर की हर सड़क प्रत्येक चौराहे स्टेशन चौक जय स्तंभ रणविजय चौक यहां तक की घंघरी नाके तक पूरे नगर में सब्जी मंडी उपलब्ध है आपको जब जहां याद आए तत्काल वहीं खड़े खड़े आप घर के लिए सब्जिया खरीद सकते है ऐसी सुविधा नगर पालिका द्वारा नगर वासियों को मुहैया कराई जा रही है। हालांकि कहने को तो हाल ही में करोड़ों रुपयों की लागत दिखाकर नगर पालिका द्वारा सब्जी मंडी निर्माण का ढिंढोरा पीटा गया था जिसमें अभी आज दिनांक को सिर्फ कपड़े मिलते हैं ।
गर्त में समाया है सामंजस्य
नगर की सड़कों पर फैली अव्यवस्था को दुरुस्त करने नगर पालिका और यातायात विभाग दोनों को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन दोनों विभागों का आपसी सामंजस्य चीन की दीवार जैसा है जिसके एक तरफ यातायात विभाग है दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन दोनों अगर एक साथ मिलकर एक सप्ताह भी संयुक्त रूप से व्यवस्था सुधारने में लग जाए सुगम यातायात के साथ साथ व्यवस्थित उमरिया दिखने लगेगा लेकिन ओर नपा प्रशासन की नाक के नीचे सड़कों चौराहों पर अव्यवस्थित फुटपाथ की दुकानें तो दूसरी ओर उनके कारण लगने वाला जाम और खड़े बेतरतीब वाहन दोनों ने व्यवस्था पर बट्टा लगाया हुआ है जरूरत है दोनों विभाग आपस में सामंजस्य बढ़ाए और नगर को सुव्यवस्थित करने में भैंस को तक पहुंचाने वाला नहीं ईमानदारी वाला प्रयास करे।