वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला थे कटनी के पत्रकारों के लिए भरोसे की पूंजी, उनके निधन से पत्रकारिता के एक युग का अंत

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वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला थे कटनी के पत्रकारों के लिए भरोसे की पूंजी, उनके निधन से पत्रकारिता के एक युग का अंत

कटनी की पत्रकारिता में कुछ नाम खबरों के साथ दर्ज होते हैं, और कुछ नाम खबरों से कहीं आगे जाकर लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बन जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला ऐसा ही एक नाम थे। उन्होंने सिर्फ खबरें नहीं लिखीं, बल्कि वर्षों के अपने सहज व्यवहार, बेबाक लेखनी और आत्मीय रिश्तों से पत्रकारिता की एक ऐसी विरासत गढ़ी, जिसमें भरोसा सबसे बड़ी पूंजी था। उनके आकस्मिक निधन के साथ कटनी ने केवल एक वरिष्ठ पत्रकार नहीं खोया, बल्कि वह व्यक्ति खो दिया, जिसके पास पत्रकारों के लिए सलाह थी, साथियों के लिए सहारा था और हर मिलने वाले के लिए अपनापन था। उनके जाने से कटनी की पत्रकारिता के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनकी लेखनी, उनका व्यक्तित्व और लोगों के दिलों में अर्जित विश्वास लंबे समय तक जीवित रहेगा।

कटनी।। आशुतोष शुक्ला केवल एक वरिष्ठ पत्रकार नहीं थे। वे उन चुनिंदा लोगों में थे, जिनकी पहचान उनके पद से ज्यादा उनके व्यक्तित्व से होती थी। सहज, सरल, मिलनसार और आत्मीय व्यवहार उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। उनसे मिलने वाला व्यक्ति पहली मुलाकात में ही उनके अपनत्व को महसूस करता था। लंबे पत्रकारिता जीवन में उन्होंने अपनी एक ऐसी पहचान बनाई, जिसमें ईमानदारी, सक्रियता और विश्वसनीयता प्रमुख थी। उन्होंने समाज से जुड़े मुद्दों को अपनी लेखनी में जगह दी और पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखा।

पत्रकारों के लिए भरोसे की पूंजी थे आशुतोष
पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ी पूंजी खबर या संपर्क नहीं, बल्कि विश्वास होता है। आशुतोष शुक्ला ने वर्षों की मेहनत से यही विश्वास अर्जित किया था। पत्रकार साथियों के बीच वे ऐसे वरिष्ठ के रूप में जाने जाते थे, जिनसे किसी भी विषय पर बेझिझक बात की जा सकती थी। किसी साथी को सलाह चाहिए हो, किसी खबर पर चर्चा करनी हो या पत्रकारिता से जुड़ी कोई परेशानी हो—आशुतोष शुक्ला से संवाद करने में किसी को संकोच नहीं होता था। उनका व्यवहार वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच दूरी पैदा करने वाला नहीं, बल्कि संवाद और अपनत्व बढ़ाने वाला था। यही कारण था कि वे पत्रकारों के लिए केवल वरिष्ठ साथी नहीं, बल्कि भरोसे की पूंजी बन गए थे।

लोगों के बीच अपनी जगह बनाना सिखा गए
आशुतोष शुक्ला के जीवन से एक महत्वपूर्ण सीख यह भी मिलती है कि लोगों के बीच जगह पद से नहीं, बल्कि व्यवहार से बनाई जाती है। उन्होंने अपने जीवन में लोगों को सम्मान दिया, उनसे संवाद बनाए रखा और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहे। शायद यही वजह है कि आज उनके जाने के बाद हर वर्ग का व्यक्ति उन्हें अपने तरीके से याद कर रहा है। उन्होंने हमेशा कुछ न कुछ सिखाया कभी अपनी पत्रकारिता से, कभी अपनी बातचीत से और कभी अपने व्यवहार से। लोगों से जुड़ना क्या होता है, रिश्तों को निभाना क्या होता है और बिना किसी दिखावे के लोगों के दिलों में जगह कैसे बनाई जाती है,आशुतोष शुक्ला इसका जीवंत उदाहरण थे।

कलेक्टर आशीष तिवारी ने व्यक्त किया गहरा शोक
कलेक्टर आशीष तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला के आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संवेदना प्रकट की है।
कलेक्टर श्री तिवारी ने परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार एवं असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में जिला प्रशासन की संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं। कलेक्टर और पुलिस प्रशासन की संवेदनाएं यह बताती हैं कि आशुतोष शुक्ला की पहचान केवल पत्रकारिता जगत तक सीमित नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में भी उनके साथ आत्मीय संबंध रहे।

पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा ने भी जताया गहरा शोक
वरिष्ठ पत्रकार एवं एल्डरमैन आशुतोष शुक्ला के आकस्मिक निधन पर पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि आशुतोष शुक्ला का असमय निधन अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उनका जाना पत्रकारिता जगत के साथ-साथ उन सभी लोगों के लिए व्यक्तिगत एवं अपूरणीय क्षति है, जो उनके सहज, सरल और मिलनसार व्यक्तित्व से जुड़े रहे। पुलिस अधीक्षक ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। उन्होंने कहा कि आशुतोष शुक्ला की पत्रकारिता, उनका सामाजिक सरोकार और लोगों के प्रति आत्मीय व्यवहार सदैव स्मरण किया जाएगा।

ईमानदार पत्रकार की बनाई अलग पहचान
आशुतोष शुक्ला ने पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई। वे समाचार पोर्टल यशभारत डॉट कॉम के संपादक के रूप में सक्रिय थे। अपनी लेखनी और पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने समाज के विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें नगर निगम में एल्डरमैन की जिम्मेदारी मिली थी और वे भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इन तमाम जिम्मेदारियों के बावजूद पत्रकारिता और पत्रकार साथियों से उनका जुड़ाव लगातार बना रहा।

अचानक थम गया सफर
कटनी के पत्रकारिता जगत के लिए उनका जाना इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि उनका सफर अचानक थम गया। परिजनों के अनुसार तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कटनी के एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें जबलपुर रेफर किया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पत्रकारिता, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

नम आंखों से दी अंतिम विदाई
वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला का अंतिम संस्कार नदीपार क्षेत्र स्थित मुक्ति धाम में किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र अनुनय शुक्ला ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में शहर के गणमान्य नागरिकों, व्यापारियों, राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। पार्टी का ध्वज समर्पित कर कार्यकर्ताओं ने अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

जनप्रतिनिधियों ने भी जताया शोक
पूर्व मंत्री एवं विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने भी आशुतोष शुक्ला के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आशुतोष शुक्ला लेखनी के धनी थे और उनके असमय चले जाने से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है।

एक अध्याय का अंत, विरासत का नहीं
किसी पत्रकार की जिंदगी केवल उसके द्वारा लिखी गई खबरों में दर्ज नहीं होती। उसकी असली पहचान उन लोगों की स्मृतियों में होती है, जिन्हें उसने प्रभावित किया, जिनका मार्गदर्शन किया और जिनके साथ रिश्ते बनाए। आशुतोष शुक्ला ने अपने पीछे ऐसी ही विरासत छोड़ी है। कटनी की पत्रकारिता के इतिहास में उनके जाने के साथ एक अध्याय का अंत हुआ है, लेकिन उनकी कहानी खत्म नहीं हुई। वह उन पत्रकारों की स्मृतियों में जीवित रहेगी, जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। वह उन लोगों की यादों में जीवित रहेगी, जिनसे उन्होंने आत्मीय संबंध बनाए। वह उनकी लिखी खबरों और पत्रकारिता के प्रति उनके समर्पण में जीवित रहेगी। और सबसे बढ़कर वह उस भरोसे में जीवित रहेगी, जो उन्होंने वर्षों में कमाया था। आशुतोष शुक्ला का जाना एक ऐसी न पूरी होने वाली क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। लेकिन एक ईमानदार पत्रकार, एक भरोसेमंद साथी और एक आत्मीय इंसान के रूप में उनकी स्मृतियां कटनी की पत्रकारिता में लंबे समय तक जीवित रहेंगी।

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