साथी पत्रकारों की आंखें नम, आशुतोष भईया को दी भावभीनी श्रद्धांजलि पत्रकारों के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहे आशुतोष शुक्ला, तकनीकी परेशानी हो या व्यक्तिगत संकट, मदद के लिए रहते थे सबसे आगे

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साथी पत्रकारों की आंखें नम, आशुतोष भईया को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
पत्रकारों के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहे आशुतोष शुक्ला, तकनीकी परेशानी हो या व्यक्तिगत संकट, मदद के लिए रहते थे सबसे आगे


कटनी।। जिले के वरिष्ठ पत्रकार, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी एवं YASHBHARAT.COM के संपादक स्वर्गीय आशुतोष शुक्ला के आकस्मिक निधन ने न केवल पत्रकारिता जगत को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि उनके साथ वर्षों तक पत्रकारिता का सफर तय करने वाले साथी पत्रकारों को भी भीतर तक झकझोर दिया है। शनिवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कई पत्रकार अपने प्रिय साथी को याद करते हुए भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।
शहर के पत्रकारों द्वारा एसबीआई तिराहा स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन कार्यालय में आयोजित शोकसभा में स्वर्गीय आशुतोष शुक्ला के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान वहां मौजूद हर पत्रकार के पास आशुतोष भईया से जुड़ी कोई न कोई याद थी—किसी के लिए वे मार्गदर्शक थे, किसी के लिए सहयोगी और किसी के लिए ऐसे आत्मीय बड़े भाई, जिनके पास हर परेशानी का समाधान खोजने की कोशिश जरूर मिलती थी।

पत्रकार साथियों के लिए था आशुतोष भईया का अलग ही प्रेम
श्रद्धांजलि सभा में पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि आशुतोष शुक्ला का पत्रकारों के प्रति प्रेम और अपनापन अलग ही था। वे केवल अपने काम तक सीमित रहने वाले पत्रकार नहीं थे, बल्कि साथी पत्रकारों की छोटी से छोटी परेशानी को भी अपनी जिम्मेदारी समझते थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में किसी साथी को तकनीकी समस्या आती, वेबसाइट, कंप्यूटर, कैमरा अथवा अन्य किसी कार्य में सहयोग की जरूरत पड़ती तो आशुतोष भईया बिना किसी औपचारिकता के मदद के लिए तैयार रहते थे। इतना ही नहीं, किसी पत्रकार साथी के व्यक्तिगत जीवन में कोई परेशानी आती तो भी वे उसे अपना समझकर सहयोग करने के लिए आगे बढ़ते थे।
साथियों ने कहा कि आज के दौर में, जब लोग अपने काम और सीमित दायरे में सिमटते जा रहे हैं, आशुतोष भईया ने पत्रकारिता में आपसी सहयोग, भाईचारे और आत्मीयता की एक अलग मिसाल कायम की। वे हर साथी के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले इंसान थे।

उनका जाना सिर्फ एक पत्रकार का जाना नहीं, एक अपने का बिछड़ जाना है
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आशुतोष शुक्ला का असमय निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका सहज स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहने की आदत उन्हें सबसे अलग बनाती थी। कई पत्रकारों ने भावुक शब्दों में कहा कि आशुतोष भईया का जाना केवल एक वरिष्ठ पत्रकार का जाना नहीं है, बल्कि पत्रकार परिवार से एक ऐसे अपने का बिछड़ जाना है, जो हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा नजर आता था।
उनके साथ बिताए गए आत्मीय पलों को याद करते हुए कई साथी भावुक हो गए। किसी ने उनके साथ पत्रकारिता के शुरुआती दिनों की यादें साझा कीं तो किसी ने उनकी तकनीकी जानकारी और हर समय मदद करने की आदत को याद किया। श्रद्धांजलि सभा का माहौल गमगीन रहा और हर आंख में अपने प्रिय साथी को अचानक खो देने का दर्द दिखाई दिया।

दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि
शोकसभा के अंत में उपस्थित सभी पत्रकारों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की गई।?श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ पत्रकार संतोष दुबे, अजय शर्मा, अमर ताम्रकार, शैलेश पाठक, विवेक शुक्ला, गिरीश श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, वंदना तिवारी, प्रेम सिंह, शिव प्रताप सिंह, संजय अग्रवाल, मुकेश तिवारी, मुरली प्रथयानी, भवानी तिवारी, शकील खान, जाहिद हुसैन, असलम खान, जीतेन्द्र कोस्टा, रवि गुप्ता, प्रवीण पारासर, नवनीत गुप्ता, अरविन्द गुप्ता, अमित यादव, अनंत चतुर्वेदी, सचिन मिश्रा, सुभाष गर्ग, कृष्ण कुमार ठाकुर, अंकुश रजक, तपन निषाद, रोहित सेन, राकेश तिवारी, विजय उपाध्याय, हेमंत सिंह, अनुज आनंद, बबलू भाईजान सहित बड़ी संख्या में पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
आशुतोष भईया आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पत्रकार साथियों के प्रति उनका प्रेम, उनका सहयोग और उनके साथ बिताई गई अनगिनत यादें हमेशा पत्रकार परिवार के दिलों में जीवित रहेंगी। पत्रकारिता जगत ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ-साथ एक सच्चा साथी और हर समय मदद के लिए तैयार रहने वाला अपना भाई खो दिया है।

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