जय हो नंदलाल की के जयघोष से गूंजा कटनी दधिकांदो महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब आला रे गोविंदा आला रे की गूंज, मटकी फोड़ने की रोमांचक प्रतिस्पर्धा और दही-मक्खन की वर्षा के बीच जीवंत हुई कान्हा की बाल लीलाएं
जय हो नंदलाल की के जयघोष से गूंजा कटनी दधिकांदो महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
आला रे गोविंदा आला रे की गूंज, मटकी फोड़ने की रोमांचक प्रतिस्पर्धा और दही-मक्खन की वर्षा के बीच जीवंत हुई कान्हा की बाल लीलाएं

कटनी।। रविवार को नगर पूरी तरह नंदलाल की भक्ति और कृष्णमय उल्लास में डूबा नजर आया। चारों ओर गूंजते जय हो नंदलाल की और आला रे गोविंदा आला रे के गगनभेदी जयघोषों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया मानो पूरा नगर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का साक्षी बन गया हो। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की श्रृंखला में आयोजित भव्य दधिकांदो महोत्सव में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्री बधाई उत्सव कमेटी के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने शहर की सड़कों को भक्तिमय बना दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों, भजनों, झांकियों और गोविंदा टोलियों के जोश ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
महाआरती से हुई शुरुआत, फिर निकली भव्य शोभायात्रा
दधिकांदो महोत्सव का शुभारंभ श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में विधिवत पूजन-अर्चन एवं महाआरती के साथ हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था अर्पित की और इसके बाद आकर्षक साज-सज्जा से सुसज्जित भव्य शोभायात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
जैसे ही शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों पर आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयघोषों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की अगवानी की। शोभायात्रा के साथ उमड़ा जनसैलाब और जगह-जगह दिखाई दे रही भक्तों की आस्था ने कटनी को मानो एक विशाल धार्मिक उत्सव स्थल में परिवर्तित कर दिया।
धर्म, संस्कृति और भक्ति की मनमोहक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
शोभायात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक भी बनी। इसमें जालपा भगत मंडली की महाआरती, नवीन ग्रुप सागर की मातृशक्ति द्वारा व्यायाम प्रदर्शन, मेरठ की पूतना वध नृत्य झांकी, छिंदवाड़ा के महाकाल ग्रुप की प्रस्तुति तथा जबलपुर की प्रीति सरगम सिंह एवं माइकल म्युजिकल ग्रुप द्वारा प्रस्तुत श्याम भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और पौराणिक प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियों को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। भक्ति संगीत की मधुर धुनों पर झूमते श्रद्धालु और जयकारों से गूंजता वातावरण देर तक लोगों के मन में बस गया।
मटकी फोड़ने में दिखा गोविंदाओं का अद्भुत जोश
दधिकांदो महोत्सव का सबसे रोमांचक दृश्य शहर के विभिन्न स्थानों पर देखने को मिला, जहां ऊंचाई पर बांधी गई मटकियों को फोड़ने के लिए गोविंदा टोलियों ने अपनी पूरी ताकत और कौशल का प्रदर्शन किया।
लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर, साईं फ्रेंड्स क्लब, घंटाघर मैदान, गर्ग चौराहा, हीरागंज, वेंकटेश मंदिर, गजानन टॉकीज चौराहा, गोल बाजार, सुभाष चौक और दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर सहित अनेक स्थानों पर मटकियां एवं वंदनवार बांधे गए थे।
गोविंदा टोलियों के उत्साह, साहस और आपसी समन्वय को देखकर श्रद्धालु भी रोमांचित हो उठे। हर सफल प्रयास के साथ तालियों और जयकारों की गूंज आसमान तक पहुंचती रही। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली एवं विजेता गोविंदा टोलियों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
दही-मक्खन की वर्षा के बीच जीवंत हुई कान्हा की बाल लीला
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने गोविंदा टोलियों और ग्वालों पर दही-मक्खन लुटाकर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की प्राचीन परंपरा को जीवंत कर दिया। दही, मक्खन और मटकी फोड़ने की परंपरा ने श्रद्धालुओं को सीधे उस भावलोक में पहुंचा दिया, जहां नटखट कान्हा अपनी ग्वाल-बाल मंडली के साथ माखन चुराते और गोपियों की मटकियां फोड़ते नजर आते हैं। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक उत्सव में सहभागिता की। हर चेहरे पर भक्ति, आनंद और उत्साह की अनोखी चमक दिखाई दी।
शहरभर में हुआ आत्मीय स्वागत, जगह-जगह बंटा प्रसाद
भव्य शोभायात्रा के स्वागत के लिए शहरभर में सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा स्वागत मंच लगाए गए थे। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया और प्रसाद का वितरण किया गया।
श्री गहोई वैश्य समाज, श्री पुरवार मंडल, राष्ट्रीय यादव संघ, गायत्री योग अनुसंधान केन्द्र, सिंधु नौजवान मंडल, वैष्णव मंडल, ब्राह्मण समाज, कटनी टेंट एंड लाइट एसोसिएशन, हीरागंज व्यापारी संघ, सब्जी-फल विक्रेता संघ एवं मेन रोड व्यापारी संघ सहित अनेक संगठनों ने आयोजन में सक्रिय सहभागिता करते हुए श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यह दृश्य नगर की सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं के प्रति शहरवासियों की गहरी आस्था का भी प्रतीक बना।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
दधिकांदो महोत्सव में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रमुख मार्गों, चौराहों और आयोजन स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती रही। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और आयोजकों की बेहतर व्यवस्थाओं के चलते विशाल शोभायात्रा शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। दधिकांदो महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कटनी केवल धार्मिक आयोजनों का शहर नहीं, बल्कि अपनी सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पूरे उत्साह के साथ जीवंत रखने वाला शहर है।
जय हो नंदलाल की के जयघोष, आला रे गोविंदा आला रे की गूंज, मटकी फोड़ते गोविंदाओं का जोश, दही-मक्खन की वर्षा और हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था—इन सबने रविवार को कटनी को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया। दधिकांदो महोत्सव का यह भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल मनोरंजन या उत्सव नहीं रहा, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता से जुड़ने का एक अद्भुत अवसर बन गया। देर रात तक शहर में गूंजते जयकारे मानो यही संदेश देते रहे।