गौरेला: श्रीराम फाइनेंस की मनमानी! किश्तें पूरी चुकाने के बाद भी नहीं मिल रहे NOC व RC, शाखा प्रबंधक बोले—’मित्तल एजेंसी से विवाद के चलते अटके हैं कई दस्तावेज’
गौरेला (जीपीएम)
गाड़ी की पूरी किश्तें मय ब्याज समय पर चुकता करने के बावजूद फाइनेंस कंपनियों के चक्कर काटना आम ग्राहकों की नियति बन गया है। गौरेला स्थित श्रीराम फाइनेंस शाखा की लचर कार्यप्रणाली के चलते एक पीड़ित ग्राहक पिछले ढाई महीने से अपनी बाइक की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
किश्तें पूरी भरीं, फिर भी बंधक बने मूल दस्तावेज
पीड़ित साजिद मंसूरी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में श्रीराम फाइनेंस से बाइक (क्रमांक 3964) फाइनेंस कराई थी। ₹1970 की मासिक किश्त उन्होंने नियमानुसार पूरी जमा कर दी और शाखा में रसीदें भी प्रस्तुत कर दीं। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा अब तक दस्तावेज नहीं सौंपे गए हैं। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें बार-बार रायपुर मुख्य कार्यालय से कागजात आने का झांसा देकर केवल तारीख पर तारीख दी जा रही है।
शाखा प्रबंधक रवि द्विवेदी का पक्ष: ‘एजेंसी से चल रहा विवाद, हेड ऑफिस में अटका है मामला’
इस पूरे मामले पर जब श्रीराम फाइनेंस गौरेला के शाखा प्रबंधक रवि द्विवेदी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल एक ग्राहक की नहीं है, बल्कि कई ग्राहकों के दस्तावेज अटके हुए हैं।
मित्तल एजेंसी से विवाद का हवाला: शाखा प्रबंधक ने बताया कि श्रीराम फाइनेंस और मित्तल एजेंसी के बीच पुराना कोर्ट केस/विवाद चल रहा है। एजेंसी स्तर से आरसी उपलब्ध न कराए जाने के कारण कई ग्राहकों की फाइलें होल्ड पर हैं।
हेड ऑफिस के जिम्मे मामला: उन्होंने बताया कि यह पुराना प्रकरण है और संबंधित कर्मचारी फिलहाल हेड ऑफिस (रायपुर) में है। वहां से समन्वय बनाकर ही दस्तावेज मंगाए जा सकते हैं।
कंपनी के आपसी विवाद की सजा ग्राहक क्यों भुगते?
आरबीआई और उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत लोन चुकता होते ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर ग्राहक को उसके मूल दस्तावेज और एनओसी सौंपना अनिवार्य है। फाइनेंस कंपनी और ऑटोमोबाइल एजेंसी के बीच क्या विवाद चल रहा है, उससे उस आम ग्राहक का कोई सरोकार नहीं जिसने पाई-पाई चुका दी है।
एनओसी न मिलने के कारण वाहन मालिक न तो गाड़ी का सही नामांतरण करा पा रहा है और न ही आरटीओ से जुड़े अन्य कानूनी कार्य पूरे हो रहे हैं। पीड़ित ने अब इस मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन और उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने की तैयारी कर ली है।