अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई या महज खानापूर्ति बरगवां में कबाड़ जब्त कर निगम ने की कार्रवाई, लेकिन स्थायी समाधान को लेकर उठे सवाल,बार-बार सामान जब्ती के बाद भी सड़कें कब होंगी अतिक्रमण मुक्त
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई या महज खानापूर्ति
बरगवां में कबाड़ जब्त कर निगम ने की कार्रवाई, लेकिन स्थायी समाधान को लेकर उठे सवाल,बार-बार सामान जब्ती के बाद भी सड़कें कब होंगी अतिक्रमण मुक्त
कटनी।। शहर में सार्वजनिक एवं शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर निगम द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन इन कार्रवाइयों की स्थायित्व को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। मंगलवार को बरगवां क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर कबाड़ व्यवसाय संचालित किए जाने के मामले में निगम के अतिक्रमण अमले ने कार्रवाई करते हुए कबाड़ एवं अन्य सामग्री जब्त की। निगम के अनुसार, मो. सादिक द्वारा सार्वजनिक भूमि का व्यावसायिक उपयोग करते हुए सड़क एवं आसपास के क्षेत्र में कबाड़ सामग्री रखी गई थी। कार्रवाई के दौरान निगम अमले ने सामग्री हटवाकर जब्त की और संबंधित को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की हिदायत दी। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमण प्रभारी मानेंद्र सिंह सहित निगम का अमला मौजूद रहा।
लेकिन सवाल यह है आखिर कब तक चलेगी सिर्फ जब्ती की कार्रवाई
बरगवां की कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या नगर निगम के पास शहर में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से निपटने के लिए कोई ठोस और स्थायी कार्ययोजना है। आखिरकार अतिक्रमण हटाने के नाम पर सामान जब्त करने की कार्रवाई कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेंगे या सार्वजनिक सड़कों और सरकारी जमीन को वास्तव में स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
अक्सर कार्रवाई से पहले संबंधित अतिक्रमणकर्ता को नोटिस दिया जाता है। इसके बाद निगम का अमला मौके पर पहुंचता है, सामान हटवाया या जब्त किया जाता है और संबंधित को दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की चेतावनी देकर कार्रवाई समाप्त हो जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि कुछ समय बाद उसी स्थान पर फिर अतिक्रमण हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
नोटिस, कार्रवाई और फिर वही स्थिति क्यों नहीं बन रही स्थायी व्यवस्था
शहर के कई हिस्सों में सड़क किनारे, फुटपाथ और सार्वजनिक जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सामग्री रखने की समस्या सामने आती रही है। यदि निगम द्वारा कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण दोबारा स्थापित हो जाता है तो महज सामान जब्त करने की कार्रवाई कितनी प्रभावी मानी जाए, यह विचारणीय विषय है। नगर निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित स्थान की नियमित निगरानी की क्या व्यवस्था है, क्या ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी इंतजाम किए जा रहे हैं,यदि नहीं, तो बार-बार होने वाली कार्रवाई आखिर किस उद्देश्य को पूरा कर रही है।
कार्रवाई की आवृत्ति भी सवालों के घेरे में
यदि किसी स्थान पर महीनों के अंतराल में बार-बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी पड़ रही है, तो यह केवल अतिक्रमणकर्ता की समस्या नहीं बल्कि प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करती है। नागरिकों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अतिक्रमण हटने के बाद उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण कैसे हो जाता है।
ऐसे में निगम प्रशासन को केवल जब्ती और नोटिस तक सीमित रहने के बजाय यह बताना चाहिए कि अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित जमीन और सड़क को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
उठ रहे सवालों का निगम को देना चाहिए जवाब
अतिक्रमण हटाना निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि कार्रवाई का परिणाम स्थायी दिखाई दे। यदि सड़क और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद कुछ समय में वही स्थिति वापस लौट आती है, तो कार्रवाई की प्रक्रिया और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
साथ ही, यदि किसी स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के नाम पर अनियमितता या निजी लाभ की कोई शिकायत अथवा आरोप सामने आते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए। बिना प्रमाण किसी अधिकारी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन नगर निगम प्रशासन को अपनी कार्रवाई की पारदर्शिता और परिणामों को लेकर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। शहरवासियों की अपेक्षा है कि निगम केवल अतिक्रमण हटाने की औपचारिकता पूरी न करे, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ और शासकीय भूमि दोबारा अतिक्रमण की चपेट में न आए।