जनता का भरोसा, महापौर का संकल्प 22 सितंबर को नगर निगम में महापौर जनसुनवाई, सुबह 11 से दोपहर 1:30 बजे तक होगी नागरिकों से सीधी बातचीत

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जनता का भरोसा, महापौर का संकल्प
22 सितंबर को नगर निगम में महापौर जनसुनवाई, सुबह 11 से दोपहर 1:30 बजे तक होगी नागरिकों से सीधी बातचीत
कटनी।। शहर की रोजमर्रा की जनसमस्याओं के समाधान और नागरिकों को प्रशासन तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में नगर निगम द्वारा मंगलवार, 22 सितंबर को महापौर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। नगर निगम कार्यालय में सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होने वाली इस जनसुनवाई में शहरवासी अपनी शिकायतें, समस्याएं, सुझाव और आवश्यक आवेदनों के साथ सीधे महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी के समक्ष अपनी बात रख सकेंगे।
जनसुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए अलग-अलग विभागों और कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही मंच पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। प्राप्त आवेदनों पर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर निराकरण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में यह जनसुनवाई केवल शिकायतें सुनने तक सीमित न रहकर उनके समाधान की दिशा में ठोस प्रशासनिक कार्रवाई का माध्यम बन सकती है।
किसी भी जनसुनवाई की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि वहां दर्ज शिकायतों पर कितनी गंभीरता और समयबद्धता से कार्रवाई होती है। नागरिकों की अपेक्षा स्वाभाविक रूप से यही रहती है कि उनकी समस्या केवल आवेदन के रूप में दर्ज न हो, बल्कि संबंधित विभाग तक पहुंचे और उसका समाधान भी दिखाई दे।
महापौर श्रीमती सूरी का यह कहना कि नागरिकों को समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, प्रशासनिक व्यवस्था को नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। अब इस पहल की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की विभागवार निगरानी, समयसीमा और निराकरण की स्थिति को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। जनसुनवाई तभी अधिक प्रभावी होगी, जब नागरिक भी अपनी समस्याओं को स्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से आवेदन के माध्यम से प्रस्तुत करें। समस्या से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, स्थान और संपर्क विवरण उपलब्ध कराने से संबंधित विभाग को कार्रवाई करने में सुविधा होगी।
नगर निगम की यह पहल शहरवासियों और स्थानीय प्रशासन के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। जरूरत इस बात की है कि जनसुनवाई में उठने वाली समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए और उनके निराकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
22 सितंबर की जनसुनवाई इसलिए महज एक निर्धारित कार्यक्रम नहीं, बल्कि नागरिकों और नगर प्रशासन के बीच सीधे संवाद का अवसर है। यदि शिकायतों की सुनवाई के साथ उनके परिणामों की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित होती है, तो यह व्यवस्था शहर की स्थानीय समस्याओं के समाधान में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

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