कटनी: नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट निरस्त, SIT निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस; हाईकोर्ट में अब 22 सितंबर को सुनवाई

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कटनी: नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट निरस्त, SIT निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस; हाईकोर्ट में अब 22 सितंबर को सुनवाई
कटनी/जबलपुर। कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 से जुड़े मामले में सोमवार को दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। कटनी जिला न्यायालय ने 18 सितंबर को जारी किए गए निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिजराज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के गिरफ्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए। वहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्त करने और अंतरिम राहत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 21 सितंबर को आगे नहीं बढ़ सकी। मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की उपयुक्त पीठ के समक्ष भेज दिया गया है और अब 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
जिला न्यायालय ने क्यों निरस्त किए गिरफ्तारी वारंट
कुठला थाने के अपराध क्रमांक 738/2026 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने 18 सितंबर को तीनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसके बाद सोमवार को हुई कार्यवाही में अदालत ने इन वारंटों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए वापस किए जाने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश में सामने आया कि इसी मामले में एसआईटी जबलपुर की ओर से गिरफ्तारी वारंट के लिए 1 सितंबर 2026 को सत्र न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 2 सितंबर को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद फरियादी पक्ष की ओर से भी वारंट जारी करने का आवेदन दिया गया, जिसे 16 सितंबर को निरस्त किया गया था।
अदालत के अनुसार, इन पूर्व कार्यवाहियों का उल्लेख किए बिना एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक की ओर से निचली अदालत में वारंट जारी करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में सत्र न्यायालय द्वारा आवेदन निरस्त किए जाने के बाद वारंट जारी करने के संबंध में इस अदालत के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न उत्पन्न होता था। इसी आधार पर 18 सितंबर को जारी वारंटों को निरस्त कर तत्काल वापस करने का निर्देश दिया गया।

SIT निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस
अदालत ने एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में यह पूछा गया है कि पूर्व की न्यायालयीन कार्यवाही और आवेदन निरस्त होने के तथ्यों से अदालत को अवगत नहीं कराने के संबंध में उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों तथा उच्च न्यायालय को सूचना क्यों न दी जाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की सूचना देने के निर्देश भी दिए हैं। वारंट की वापसी और आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण की पत्रावली 25 सितंबर 2026 को प्रस्तुत की जाएगी।

हाईकोर्ट में भी चल रही है कानूनी लड़ाई
इसी मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में WP No. 37216 of 2026 के माध्यम से कुठला थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। याचिका में एफआईआर निरस्त करने के साथ अंतरिम राहत और कठोर कानूनी कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने पक्ष रखा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि एफआईआर में उनके विरुद्ध प्रत्यक्ष अपराध का पर्याप्त आधार नहीं है और उन्हें गलत तरीके से मामले में आरोपी बनाया गया है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने याचिका और अंतरिम राहत का विरोध किया है। सरकारी पक्ष ने जांच में सहयोग नहीं करने, सह-आरोपियों के साथ कथित संबंध तथा जांच की परिस्थितियों का हवाला दिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि उनके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है। इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

21 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ
21 सितंबर को मामला न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह आपत्ति उठाई गई कि एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं, इसलिए मामले की सुनवाई उस रोस्टर वाली उपयुक्त पीठ के समक्ष होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से इस मांग का विरोध करते हुए तर्क दिया गया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं बाद में जोड़ी गई हैं और मामले की सुनवाई पहले से निर्धारित पीठ के समक्ष ही होनी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी देखने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त पीठ के समक्ष भेजने का आदेश दिया। इसके चलते 21 सितंबर को अंतरिम राहत के मुद्दे पर कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ। अब मामले की सुनवाई मंगलवार 22 सितंबर 2026 को नई/उपयुक्त पीठ के समक्ष प्रस्तावित है।

जमीन सौदे से जुड़ा है पूरा प्रकरण
अपराध क्रमांक 738/2026 को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शिकायतकर्ता की ओर से पैतृक जमीन के कथित लेनदेन में दबाव और पद के कथित दुरुपयोग सहित कई आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्टों में जमीन के मूल्य और रजिस्ट्री से संबंधित अलग-अलग आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है और इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी कारण हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायिक रोस्टर का प्रश्न भी सामने आया।
अब 22 सितंबर पर नजर
इस पूरे प्रकरण में फिलहाल दो अलग-अलग न्यायालयीन कार्यवाहियां महत्वपूर्ण हैं। एक ओर कटनी जिला न्यायालय ने 18 सितंबर को जारी गिरफ्तारी वारंट निरस्त करते हुए एसआईटी निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस दिया है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट में नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्त करने और अंतरिम राहत की याचिका पर सुनवाई अब 22 सितंबर को संबंधित पीठ के समक्ष होने की संभावना है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि गिरफ्तारी वारंट निरस्त होने का आदेश अपने आप में आरोपों से मुक्ति या मामले के अंतिम निपटारे का आदेश नहीं है। इसी तरह हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई लंबित है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 21 सितंबर को अंतरिम राहत पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। मामले में आरोपों की सत्यता और संबंधित पक्षों की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
अगली महत्वपूर्ण तारीख: 22 सितंबर 2026 — मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई।
जिला न्यायालय में पत्रावली: 25 सितंबर 2026 को आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत की जानी है।

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