अवैध वृक्ष कटाई से ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, कलेक्टर से तत्काल कार्रवाई की मांग

0

अवैध वृक्ष कटाई से ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, कलेक्टर से तत्काल कार्रवाई की मांग
कटनी। ग्राम पंचायत टेढ़ी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुनहरा, भटगवां और सुनहरी क्षेत्र में शासकीय भूमि पर कथित रूप से हो रही अवैध वृक्ष कटाई को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कटनी को लिखित आवेदन देकर क्षेत्र में हो रही कथित अवैध कटाई एवं लकड़ी के परिवहन की जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से क्षेत्र में हरे-भरे, पुराने एवं छायादार पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में नीम, पीपल, बरगद और आम जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों के काटे जाने का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते इस गतिविधि पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में इसका गंभीर असर पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर पड़ सकता है।

जंगल ही ग्रामीणों का सबसे बड़ा सहारा
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेक परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। जंगल ग्रामीणों को जलाऊ लकड़ी, पशुओं के लिए चारा, फल-फूल, औषधीय वनस्पतियां तथा अन्य आवश्यक वन उपज उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा जंगल वर्षा, भूजल, मिट्टी और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई केवल पेड़ों का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे आने वाली पीढ़ियों की आजीविका और प्राकृतिक सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। पेड़ों की संख्या कम होने से गर्मी बढ़ने, जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने, मिट्टी के कटाव और स्थानीय वन्यजीवों के आवास प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा स्थल निरीक्षण
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। साथ ही शासकीय भूमि पर काटे गए पेड़ों, लकड़ी के परिवहन और संबंधित गतिविधियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा बिना वैध अनुमति के वृक्षों की कटाई या लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि क्षेत्र में वन एवं राजस्व भूमि की स्थिति स्पष्ट कर नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

प्रकृति बचाना ग्रामीणों के भविष्य की सुरक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका का आधार है। इसलिए जंगलों की सुरक्षा को ग्रामीण हित, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, मौके का निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यदि समय रहते अवैध कटाई पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका खामियाजा सबसे पहले उन्हीं ग्रामीण परिवारों को भुगतना पड़ेगा, जिनका जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जंगलों की सुरक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed