ग्राम पंचायत सेमरा में व्यावसायिक परिसर निर्माण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, ऑक्सी जोन की भूमि पर बिना सीमांकन और राजस्व विभाग की पूर्व जानकारी के निर्माण कराने का आरोप
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरा में शासकीय भूमि पर बनाए जा रहे 15वे वित्त आयोग से स्वीकृत कार्य व्यावसायिक परिसर (दुकान शेड) को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की है। निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन के ठीक सामने स्थित शासकीय भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को प्रशासन ने रुकवा दिया और मौके पर जेसीबी मशीन से निर्मित ढांचे को हटाया गया। इस कार्रवाई के बाद ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सेमरा द्वारा प्रस्तावित व्यावसायिक परिसर (दुकान शेड) निर्माण कार्य मार्च 2026 में स्वीकृत कराया गया था। लेकिन निर्माण स्थल को लेकर राजस्व विभाग और पंचायत के बीच आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम के निर्देशन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
एसडीएम ने बताई कार्रवाई की वजह, ऑक्सी जोन की भूमि पर निर्माण का मामला
मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि जिस भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा व्यावसायिक परिसर का निर्माण कराया जा रहा था, वह भूमि पूर्व से ही के ऑक्सी जोन लिए चिन्हांकित है।
एसडीएम के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा राजस्व विभाग से विधिवत भूमि सीमांकन कराए बिना और विभाग को पूर्व सूचना दिए बिना निर्माण कार्य शुरू कराया जा रहा था। नियमों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।
एसडीएम ने बताया कि ग्राम पंचायत के सरपंच की उपस्थिति में सहमति बनाकर निर्माण कार्य रुकवाया गया तथा मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी शासकीय भूमि पर निर्माण से पहले राजस्व विभाग से भूमि की स्थिति, सीमांकन और आवश्यक अनुमति के संबंध में विधिवत जानकारी लेना जरूरी है।
मार्च 2026 में स्वीकृति, फिर निर्माण स्थल की जांच क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दुकान शेड निर्माण कार्य मार्च 2026 में स्वीकृत हुआ था, तो निर्माण शुरू होने से पहले भूमि की वास्तविक स्थिति और ऑक्सी जोन में उसके शामिल होने की जांच क्यों नहीं की गई?
यदि भूमि पूर्व से ही ऑक्सी जोन के लिए चिन्हांकित थी, तो पंचायत स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने से लेकर स्वीकृति और निर्माण शुरू कराने तक जिम्मेदारी किसकी थी? क्या निर्माण की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति जारी करने से पहले स्थल का सत्यापन किया गया था?
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
– मार्च 2026 में स्वीकृति के समय भूमि की स्थिति का सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
– क्या निर्माण कार्य की तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति में स्थल का उल्लेख था?
– यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था तो अब तक हुए संभावित खर्च की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
– क्या इस मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका की जांच होगी?
हाल ए हलचल न्यूज का सवाल: निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन के ठीक सामने शासकीय भूमि पर दुकान शेड निर्माण की स्वीकृति से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया अब जांच के दायरे में होनी चाहिए। आखिर सरकारी धन से निर्माण की स्वीकृति देने से पहले जमीन की स्थिति की पड़ताल क्यों नहीं हुई? प्रशासन को स्वीकृति, निर्माण पर हुए खर्च और जिम्मेदारी तय करने के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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