जेएमएस की लापरवाही से भाबुतोष की दर्दनाक मौत
स्थानीय अस्पताल के बाद शहडोल के निजी अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि
परिजनों के पश्चिम बंगाल से आने के बाद होगा पीएम व अंतिम संस्कार
उमरिया। जिले के जोहिला एरिया के विंध्या भूमिगत खदान में माइंस श्रमिक के मौत बुधवार की सुबह हो गई। भूमिगत खदान विंध्या माइन्स में ठेके में लगी जेएमएस कम्पनी में कार्यरत मृत श्रमिक भाबुतोष मजूमदार की रात 11 से सुबह 7 बजे तक ड्यूटी थी, सुबह 6.30 बजे कार्य के दौरान अंडर ग्राउंड माइंस में घटना स्थल पर मृतक के सर पर मशीन का जैक गिरा ,जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी मौत हो गयी। घटना के बाद श्रमिक को नोरोजाबाद स्थित कालरी अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सको ने मृत घोषित कर दिया, बावजूद इसके जेएमएस कम्पनी के जिम्मेदार शहडोल निजी अस्पताल ले गए, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
कंपनी ने साध ली चुप्पी
मृत युवक भूमिगत खदान में रूप बोल्ट लगा रहा था, वही दूसरे श्रमिक मशीन मेंटेनेन्स का काम कर रहे थे, इसी दौरान घटना घटित हुई है। भूमिगत खदान में ठेके में काम कर रही जेएमएस कम्पनी की लापरवाही का शिकार हुआ, युवा श्रमिक पश्चिम बंगाल का बताया गया है, घटना किन कारणों से हुई ,यह तो कालरी प्रबंधन के जांच का विषय है, हालांकि संदिग्ध परिस्थितियों में श्रमिक की मौत के बाद जेएमएस कम्पनी के जिम्मेदार चुप्पी बनाये हुए है। नोरोजाबाद में चिकित्सक के मृत घोषित करने के बाद भी मृत श्रमिक को अकारण उपचार के नाम पर शहडोल क्यों ले जाया गया और हादसे में श्रमिक के मौत की पुष्टि के बाद पुलिसिया कार्यवाही की गई, मामले में जांच के दौरान यह भी समझने की ज़रूरत है कि घटना के दौरान मृत श्रमिक माइंस सेफ्टी का पालन कर रहा था या नही।
हादसे के बाद जागता है डीजीएमएस
एसईसीएल की कोयला खदानों में होने वाली दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। खदानों में होने वाले से होने वाली मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। खदानों में सुरक्षा की अनदेखी दुर्घटना का प्रमुख कारण है। प्रबंधन हादसों पर अंकुश लगाने प्रबंधन जो भी दावा करे, लेकिन दुर्घटनाओं में कमी नहीं दिख रही है। खदानों में डीजीएमएस के निर्देशों के अनुसार काम कराया जाता है, लेकिन अक्सर हादसे के बाद ही डीजीएमएस की सक्रियता दिखती है। कोयला खदानों में डंपर व अन्य हैवी मशीनों के काम के दौरान अचानक ब्रेक ड्राउन व अन्य दुर्घटना ग्रस्त होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही है।
कंपनी की सुरक्षा की जिम्मेदारी
डीजीएमएस की भूमिका पहले से अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। खदानों का निरीक्षण करने के साथ ही सुरक्षा के अपनाए जा रहे मापदंड की रिपोर्ट ली जानी चाहिए, सुरक्षा मैनेजमेंट पालन पर समय-समय पर दिशा निर्देश दिया जा रहा है। सुरक्षा के सभी मापदंड का पालन कराना डीजीएमएस का कर्तव्य है। कोल इंडिया हो या फिर निजी खदान सुरक्षा के प्रति अनदेखी स्वीकार पर कार्यवाही होनी चाहिए, माइंस एक्ट 2017 से खदान में काम कराना आसान है। अब सुरक्षा के साथ हर पहलू को देखना खदान प्रबंधन की जिम्मेदारी हो गई है। पहले हर बार अनुमति लेनी पड़ती थी, पर अब सेल्फ रेग्युलेशन की ओर बढ़ रहे हैं। आपकी माइंस है, तो जिम्मेदारी भी आपकी बनती है कि आखिर किस तरह सुरक्षात्मक ढंग से कार्य कराया जाए। नए एक्ट से नियम कायदा में शिथिलता आ गई है, निजी कंपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रहे, मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी ठेका कंपनी के भी प्रबंधन को है।