जिला जीपीएम के वीवीआईपी क्षेत्र में अंधेरे का साम्राज्य, ‘चिराग तले अंधेरा’
गौरेला। नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का जिला मुख्यालय गौरेला इन दिनों एक अजीब तस्वीर पेश कर रहा है। जिला मुख्यालय के बेहद महत्वपूर्ण और वीवीआईपी क्षेत्र में ही शाम होते ही घुप्प अंधेरा छा जाता है। दत्तात्रेय मंदिर से सेमरा तिराहे तक पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने से मुख्य मार्ग पर आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
गौरेला से पेंड्रा मार्ग का यह हिस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी क्षेत्र में जिला कलेक्टर मुख्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला पंचायत मुख्यालय और जिला अस्पताल जैसे प्रमुख शासकीय संस्थान स्थित हैं। बावजूद इसके शाम ढलते ही सड़क का बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब जाता है।
बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। मुख्य मार्ग पर अक्सर आवारा मवेशियों की मौजूदगी रहती है। वहीं सड़क के दोनों ओर लगे स्टॉपर और कम रोशनी के कारण दोपहिया एवं चारपहिया वाहन चालकों को काफी सावधानी से गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अंधेरे के कारण दुर्घटना के साथ-साथ असामाजिक गतिविधियों और लूटपाट की आशंका भी बनी रहती है।
नगरपालिका अध्यक्ष ने बताया—आगे ग्राम पंचायत का क्षेत्र
इस संबंध में नगरपालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे से बात की गई। उन्होंने बताया कि दत्तात्रेय मंदिर की बाउंड्री तक नगरपालिका परिषद गौरेला के क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट चालू है। इसके आगे ग्राम पंचायत सेमरा का क्षेत्र प्रारंभ हो जाता है। नगरपालिका के पास ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था करने के लिए कोई अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और न ही शासन की ओर से ऐसा कोई आदेश है कि नगरपालिका ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट का प्रबंधन करे।
यहीं से समस्या और गंभीर हो जाती है। एक ओर नगरपालिका अपने अधिकार क्षेत्र तक जिम्मेदारी निभाने की बात कह रही है, तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत क्षेत्र में आने वाला वही मुख्य मार्ग जिला मुख्यालय की महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाओं तक पहुंचने वाला प्रमुख रास्ता है।
जिम्मेदारी के फेर में जनता क्यों भुगते?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि नगरपालिका और ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र की सीमा के बीच आखिर आम जनता की सुरक्षा क्यों फंसनी चाहिए?
जब यह क्षेत्र जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां प्रतिदिन अधिकारी, कर्मचारी, मरीज, उनके परिजन तथा आम नागरिक आवागमन करते हैं, तो ऐसे प्रमुख मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?
लोगों का कहना है कि ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली स्थिति को अब समाप्त करने की जरूरत है। यदि ग्राम पंचायत और नगरपालिका परिषद के पास इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए अतिरिक्त फंड नहीं है, तो जिला प्रशासन को पहल करते हुए स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए।
कलेक्टर से स्थायी समाधान की मांग
आम नागरिकों का कहना है कि जिला कलेक्टर को इस मामले में संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों की संयुक्त बैठक लेकर दत्तात्रेय मंदिर से सेमरा तिराहे तक पूरे मार्ग की स्थायी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि शाम और रात के समय इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को राहत मिल सके।
सवाल यही है जब तक जवाबदारी तय नहीं होगी, क्या जिला मुख्यालय के वीवीआईपी क्षेत्र में अंधेरे का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?