किसानों की पैतृक भूमि पर प्रशासन की ‘दबंगई’: बिना नोटिस और सहमति के उद्यानिकी महाविद्यालय का निजी भूमि पर अवैध कब्जा!

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बदरौडी (देवगांव) का मामला: हल्का पटवारी ने काटा फोन, तो पीड़ित किसानों ने लगाई एसडीएम से गुहार; पटवारी को मौके पर भेजने के निर्देश

मरवाही। मरवाही तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत बदरौडी के देवगांव से प्रशासन की मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ निर्माणाधीन बिसाहू दास महंत उद्यानकी महाविद्यालय के लिए स्थानीय किसानों की बिना सहमति, बिना किसी पूर्व सूचना अथवा बिना किसी कानूनी नोटिस के जबरन उनकी पैतृक भूमि पर कब्जा कर बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया है। जब पीड़ित किसानों ने इसकी शिकायत करनी चाही, तो जिम्मेदार अधिकारी फोन बंद कर भागते नजर आए। हालांकि, एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद मामले में एक नया मोड़ आया है।

एकड़ भर ज़मीन पर जबरन कब्जा, नहीं दिया गया कोई नोटिस

मामले में अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए युवा किसान प्रभात कुमार जैसवाल ने बताया कि कॉलेज निर्माण के नाम पर उनकी पैतृक भूमि की करीब 1 एकड़ 13 डिसमिल जमीन और उनके अन्य भाई-बंधुओं की 1 से 2 एकड़ जमीन को अवैध रूप से बाउंड्री के दायरे में लिया जा रहा है। प्रभात कुमार ने कहा, “यह हमारी पुश्तैनी जमीन है, जिस पर हमारे पूर्वजों के समय से कब्ज़ा और खेती है। प्रशासन ने हमें न तो कोई नोटिस दिया और न ही हमारी सहमति ली। यह सीधे तौर पर हमारी ज़मीन को हथियाने की साजिश है।”

पटवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, शिकायत करने पर काटा फोन

प्रभावित किसान राघवेंद्र तिवारी ने राजस्व विभाग और कॉलेज प्रबंधन की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा, “पटवारी ने जब पहले जमीन की नापजोड़ की थी, तब किसी दूसरी जगह को चिन्हित किया गया था। लेकिन आज जब निर्माण कार्य शुरू हुआ, तो वे हमारी निजी पट्टे की जमीन पर आकर घेराबांदी करने लगे।” किसानों के पास इस जमीन के पुख्ता पट्टे और पीढ़ी-दर-पीढ़ी के कागजात मौजूद हैं। जब किसानों ने इस गड़बड़ी को लेकर हल्का पटवारी से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनसे संपर्क ही नहीं हो पाया और उन्होंने फोन से दूरी बना ली।

एसडीएम ने लिया त्वरित संज्ञान, पटवारी को मौका स्थल पर भेजने के निर्देश

पटवारी की इस बेरुखी और मौका स्थल पर बढ़ते तनाव के बीच, सजग किसानों ने सीधे अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/एसडीएम) से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। एसडीएम साहब ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने पीड़ित किसानों को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट कहा है कि वे वस्तुस्थिति की जांच और सही नापजोड़ के लिए पटवारी को तत्काल मौका स्थल (घटनास्थल) पर भेज रहे हैं।

किसानों ने कहा- पारदर्शी सीमांकन के बाद ही आगे बढ़ेगा काम

बुजुर्ग किसान जीतराम /चरकु सहित अन्य ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक पटवारी मौके पर पहुंचकर किसानों के पट्टे और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पारदर्शी सीमांकन नहीं करते, तब तक वे अपनी पैतृक भूमि पर कोई भी एकतरफा निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके अधिकारों का हनन किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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