भोपाल के आदेशों को ठेंगा? बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में अब भी नियम विरुद्ध दी जा रही पत्र प्राप्ति रसीद

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शहडोल। शासकीय कार्यालयों में प्रस्तुत किए जाने वाले पत्रों और आवेदनों की प्राप्ति रसीद (रिसीविंग) देने के संबंध में मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्षों पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन शहडोल स्थित बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में इन आदेशों का पालन आज भी सवालों के घेरे में है। यहां पत्र जमा करने वाले आवेदकों को विधिवत प्राप्ति रसीद देने के बजाय कई मामलों में केवल सादे कागज पर हस्ताक्षर कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

हाल ही में नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन द्वारा अधिष्ठाता, बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज को सौंपे गए एक ज्ञापन की प्राप्ति रसीद चर्चा का विषय बनी हुई है। प्राप्त दस्तावेज में केवल हस्ताक्षर और दिनांक अंकित दिखाई दे रहे हैं, जबकि कार्यालयीन प्राप्ति से संबंधित आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय भोपाल द्वारा 27 जुलाई 2006 को जारी पत्र क्रमांक 1745/2318/06/1/9 में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि किसी भी आवेदन, पत्र या दस्तावेज की प्राप्ति देते समय प्राप्तकर्ता कर्मचारी अपने हस्ताक्षर करे, प्राप्ति की पूर्ण तिथि अंकित करे तथा नाम, पदनाम एवं कार्यालय की स्पष्ट मुहर लगाए। शासन ने यह भी माना था कि अधूरी प्राप्ति रसीद भविष्य में विवाद और जवाबदेही की समस्या उत्पन्न करती है।

सूत्रों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में कई बार आवेदकों को नियमित प्राप्ति क्रमांक, पंजीयन विवरण अथवा कार्यालयीन मुहर के बिना ही रसीद दे दी जाती है। जबकि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत प्राप्त पत्रों का पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उसका संदर्भ क्रमांक भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इस विषय को लेकर पूर्व में भी सवाल उठ चुके हैं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तब बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में उनका पालन क्यों नहीं हो रहा? अब निगाहें जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए व्यवस्था को शासन के नियमों के अनुरूप बनाते हैं या नहीं।

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