तरइगांव में भ्रष्टाचार की नाली सरपंच सचिव मिलकर 15 वें वित्त की राशि में लगा रहें शासन को चूना भ्रष्टाचार उजागर के बाद भी जारी है काला खेल
गौरेला। जिले में विकास कार्यों के नाम पर किस तरह सरकारी पैसों को ठिकाने लगाया जा रहा है, इसका पर्दाफाश ‘हाल ए हलचल’ न्यूज़ नेटवर्क ने प्रमुखता से किया है। 
गौरेला क्षेत्र के ग्राम पंचायत तरइगांव के दफ़ाई टोला (चौरा मंदिर के सामने) में 15वें वित्त आयोग की करीब एक लाख रुपये की लागत से बन रही नाली निर्माण में ठेकेदार और पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी सामने आई है।
हाल ए हलचल की टीम ने 24 मई को किया था ग्राउंड जीरो का निरीक्षण
बीते 24 मई 2026 को ‘हाल ए हलचल’ की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का बारीकी से निरीक्षण किया था। टीम के कैमरे में जो तस्वीरें और वीडियो कैद हुए, उन्होंने निर्माण में हो रहे फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। मौके पर तकनीकी मानकों को पूरी तरह से ताक पर रखा गया था। टीम के निरीक्षण में साफ पाया गया कि:
नाली की दीवार की मोटाई एस्टीमेट से बेहद कम रखी गई है।
मजबूती के लिए बिछाए गए सरियों के बीच की दूरी बहुत ज्यादा है।
कंक्रीट की ढलाई के लिए दोनों तरफ सेंटरिंग (शटरिंग) का घोर अभाव है, सीधे मिट्टी के सहारे ढलाई की जा रही है।
घटिया क्वालिटी की सीमेंट और गुणवत्ताहीन मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
टीम ने इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए, जनहित में प्राथमिकता के साथ इस खबर का प्रमुखता से प्रसारण किया था।
खबर के असर के बाद दौड़े अधिकारी, इंजीनियर ने मानी गड़बड़ी
‘हाल ए हलचल’ पर खबर प्रसारित होने के बाद आखिरकार विभागीय अधिकारियों की नींद टूटी।
खबर के असर के चलते ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के इंजीनियर देवांगन ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। हमारे द्वारा उजागर की गई खामियों की पुष्टि करते हुए इंजीनियर ने खुद माना कि काम में घोर अनियमितता हुई है।
इंजीनियर देवांगन ने अपना बयान देते हुए स्पष्ट किया कि, “काम में शुरुआती 7 मीटर में भारी अनियमितता पाई गई है, जिसे ढाल दिया गया है।
उस 7 मीटर के हिस्से का मूल्यांकन (Valuation) नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, आगे के काम के लिए सुधार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
सरपंच-सचिव की मनमानी पर अब भी सवाल बरकरार
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनपद पंचायत सीईओ को पूर्व में ही गुणवत्ताहीन निर्माण की जानकारी दे दी गई थी, फिर भी काम धड़ल्ले से जारी रहा।
सरपंच और सचिव अपनी मनमानी पर उतारू रहे। खबर चलने के बाद भले ही इंजीनियर ने 7 मीटर की गड़बड़ी मानकर उसका भुगतान रोकने की बात कही है, लेकिन क्या सरकारी पैसों का दुरुपयोग करने वालों पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी?
क्या जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर महोदय इस मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या फिर भ्रष्टाचार की यह नाली यूं ही बहती रहेगी?
‘हाल ए हलचल’ इस मुद्दे पर अपनी नजर बनाए रखेगा।