DEO रजनीश तिवारी का औचक निरीक्षण, अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन काटने के निर्देश जिले के कई स्कूलों और कार्यालयों में पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी, लापरवाही पर जताई नाराज़गी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने जिले के विभिन्न स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सर्वप्रथम लरकेनी स्थित हाई स्कूल का औचक निरीक्षण किया जहां पर उन्होंने एक कैंपस में मौजूद प्राथमिक और मिडिल स्कूल का भी निरीक्षण किया और कक्षा नवमी में बच्चों के प्रवेश नहीं होने पर प्रभारी प्राचार्य को जमकर फटकार लगाई साथ ही उन्होंने उपस्थित छात्र छात्राओं को स्कूली ड्रेस एवं पुस्तकों का वितरण भी कराया।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक शाला पथर्री टोला का निरीक्षण किया और स्कूल की दर्ज संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी मरवाही स्थित बीआरसी कार्यालय पहुंचे जहां पर उन्होंने बीईओ,बीआरसी और मरवाही विकासखंड के सभी सीएसी की आवश्यक बैठक ली तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
यहाँ पर उन्होंने कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी ली जिसमे तीन कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इन कर्मचारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को *वेतन काटने के निर्देश* जारी किए।
निरीक्षण के दौरान DEO तिवारी ने बीईओ कार्यालय मरवाही का भी निरीक्षण किया और कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी ली।
इसके पश्चात जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दानीकुण्डी हाई स्कूल का निरीक्षण किया गया जहां पर उन्होंने बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति पंजी का मिलान VSK ऐप से किया साथ ही बुक स्कैनिंग की जानकारी ली।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सकोला स्थित कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल का निरीक्षण किया गया जो कि अब स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल के रूप में चयनित हो चुका है।
सकोला स्थित स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं प्रार्थना में भी शामिल हुए और बच्चों संग प्रार्थना की।
जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी BEO और BRC को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण करें और प्रतिवेदन जिला कार्यालय को भेजें।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति और समयबद्ध शिक्षण कार्य अनिवार्य है।