लोक अदालत में बिखरने से बचा परिवार: जज व वकीलों की समझाइश से पति-पत्नी के बीच हुआ समझौता, राजी-खुशी लौटे घर
पेंड्रारोड (छत्तीसगढ़):
न्यायालय प्रथम जिला न्यायाधीश अरविन्द कुमार, पेंड्रारोड के प्रयास और उभय पक्ष के अधिवक्ताओं की सकारात्मक पहल से एक वैवाहिक विवाद सुखद मोड़ पर समाप्त हुआ। नेशनल लोक अदालत के मंच पर टूटने की कगार पर पहुंचा एक परिवार फिर से एक हो गया।
क्या था मामला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी दिलीप कोटहा की ओर से उनके अधिवक्ता रमेश कुमार शर्मा ने पत्नी रीतू बाई के विरुद्ध तलाक की अर्जी न्यायालय में प्रस्तुत की थी। माननीय न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान लेते हुए अनावेदिका रीतू बाई को नोटिस जारी किया गया। नोटिस के आधार पर 07 सितंबर 2026 को रीतू बाई अपने अधिवक्ता अब्दुल रसीद खान के साथ न्यायालय में उपस्थित हुईं।
न्यायाधीश व अधिवक्ताओं की समझाइश लाई रंग:
पेशी के दौरान माननीय न्यायाधीश अरविन्द कुमार एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं द्वारा पति-पत्नी को विस्तार से समझाइश दी गई। उन्हें समझाया गया कि छोटी-मोटी वैचारिक असहमतियों को भुलाकर अपने तीनों बच्चों के सुखद भविष्य और परवरिश को प्राथमिकता दें तथा सुखमय दांपत्य जीवन व्यतीत करें।
लोक अदालत में हुआ राजीनामा:
लोक अदालत के अवसर पर दोनों पक्ष न्यायालय में उपस्थित हुए। न्यायालय और अधिवक्ताओं की समझाइश का सम्मान करते हुए दोनों पक्षों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ रहने का संकल्प लिया। इसके पश्चात दोनों ने आपसी सहमति से समझौतानामा प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर मामले का पूर्ण निपटारा कर दिया गया। दोनों पक्ष लोक अदालत परिसर से ही राजी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुए।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश:
इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान समाज के लिए एक बड़ा और प्रेरक संदेश है कि वैचारिक मतभेदों के चलते ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे हंसता-खेलता परिवार बिखर जाए। इस पारिवारिक विवाद को सुलझाने और परिवार को टूटने से बचाने में न्यायाधीश अरविन्द कुमार सहित अधिवक्ता अब्दुल रसीद खान और अधिवक्ता रमेश कुमार शर्मा की विशेष व सराहनीय भूमिका रही।