गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: ग्राम तरइगांव में सरपंच की मनमानी, मानकों को ताक पर रखकर हो रहा नाली निर्माण, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा सरकारी पैसा!

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गौरेला: जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के गौरेला क्षेत्रांतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत तरइगांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुलेआम बर्बादी का मामला सामने आया है।

 

ग्राम तरइगांव के दफ़ाई टोला में चौरा मंदिर के सामने ग्राम पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण में इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

 

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह कार्य किसी ठेकेदार द्वारा नहीं, बल्कि सीधे सरपंच की देखरेख में कराया जा रहा है, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

निर्माण स्थल से प्राप्त वीडियो और तस्वीरों का तकनीकी विश्लेषण करने पर कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जो यह साबित करती हैं कि काम में सिर्फ लीपापोती की जा रही है:

 

निर्माण में बरती जा रही ये 4 बड़ी लापरवाहियां:

नाली निर्माण में उपयोग की सरिया की दूरी एक एक फुट में है जबकि सरिया की दूरी छ इंच होना चाहिए। इसके साथ ही तय मानक मात्रा में सरिया नहीं लगाया जा रहा है।

 

‘कवर ब्लॉक’ का कोई इस्तेमाल नहीं: सरिये और जमीन के बीच जरूरी गैप मेंटेन करने के लिए कवर ब्लॉक नहीं लगाए गए हैं। सरिया सीधे मिट्टी को छू रहा है, जिससे उसमें जल्द जंग लगेगा और पूरा ढांचा कुछ ही समय में टूटकर बिखर जाएगा।

 

कचरे और गंदगी के बीच ढलाई की तैयारी: निर्माण स्थल पर सूखी पत्तियां, मिट्टी के ढेले और खाली बोरियां पड़ी हैं। बिना साफ-सफाई किए इस कचरे के ऊपर ही ढलाई करने की तैयारी है। इससे कंक्रीट की पकड़ कमजोर होगी और नाली में दरारें आ जाएंगी।

 

जुगाड़ की शटरिंग और कच्ची मिट्टी का सहारा: कंक्रीट को रोकने के लिए लगाई गई लोहे की प्लेटें बेतरतीब हैं और कई जगहों पर तो सिर्फ कच्ची मिट्टी की दीवार का ही सहारा लिया जा रहा है। ढलाई के दौरान मिट्टी के मसाले में मिलने से निर्माण की बची-खुची मजबूती भी खत्म हो जाएगी।

 

जिम्मेदारों पर उठते सवाल

चूंकि यह नाली निर्माण का कार्य सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहा है, इसलिए इस घोर लापरवाही के लिए सरपंच और पंचायत सचिव सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। बिना गुणवत्ता और मानकों के कराए जा रहे इस काम को देखकर स्पष्ट होता है कि इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ निर्माण नहीं, बल्कि किसी तरह काम निपटाकर पैसों की हेरफेर करना है।

 

उच्च अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग

जनहित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जिला प्रशासन, जनपद पंचायत गौरेला के सीईओ (CEO) और तकनीकी अधिकारियों (सब-इंजीनियर) को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। मौके का मुआयना कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। जब तक कार्य इस्टीमेट और मानकों के अनुसार सुधार कर न किया जाए, तब तक इसके मूल्यांकन और भुगतान पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।

 

जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह भ्रष्टाचार की नाली में बहने से रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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