पेंड्रारोड में विकसित हो ‘गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर राष्ट्रीय स्मृति परिसर’: सांसद ज्योत्सना महंत केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र भेजकर राष्ट्रीय स्तर के स्मारक, संग्रहालय एवं सांस्कृतिक-पर्यटन केंद्र बनाने की मांग
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रारोड में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करने और क्षेत्र को राष्ट्रीय सांस्कृतिक-पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की मांग उठी है। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर पेंड्रारोड में “गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर राष्ट्रीय स्मृति परिसर” विकसित किए जाने की पहल करने का आग्रह किया है।

सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर का पेंड्रारोड प्रवास विशेष महत्व रखता है। स्थानीय एवं ऐतिहासिक स्रोतों में पेंड्रारोड क्षेत्र से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर तथा उनकी पत्नी श्रीमती मृणालिनी देवी के संबंध का उल्लेख मिलता है। उनके पेंड्रारोड आगमन की स्मृति बिलासपुर रेलवे स्टेशन से जुड़े उस चर्चित प्रसंग से भी जुड़ी है, जिसे उनकी रचना ‘फाँकी’ के संदर्भ में याद किया जाता है।
सांसद ने कहा कि यह विरासत केवल छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित एवं विकसित करने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक पहल की आवश्यकता जताई है।
स्मारक से लेकर शोध केंद्र तक की योजना
पत्र में पेंड्रारोड में प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत रवीन्द्रनाथ ठाकुर स्मारक एवं प्रतिमा परिसर, संग्रहालय एवं व्याख्या केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही गुरुदेव के जीवन, साहित्य, पेंड्रा प्रवास और छत्तीसगढ़ से उनके संबंधों पर स्थायी प्रदर्शनी लगाने की बात कही गई है।
इसके अलावा तत्कालीन सेनेटोरियम अथवा उससे संबंधित उपलब्ध ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण, रवीन्द्र साहित्य शोध एवं अध्ययन केंद्र, डिजिटल अभिलेखागार, पुस्तकालय तथा ऑडियो-विजुअल संग्रह विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
‘टैगोर हेरिटेज सर्किट’ विकसित करने का सुझाव
सांसद ज्योत्सना महंत ने पेंड्रारोड-बिलासपुर को जोड़ते हुए “Tagore Heritage Circuit” विकसित करने का सुझाव भी दिया है। प्रस्तावित परिसर में मुक्ताकाश रंगमंच, साहित्यिक सभागार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने की बात कही गई है।
पत्र में देश-विदेश के शोधार्थियों, साहित्यकारों और पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से पेंड्रारोड को राष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया है। सांसद ने कहा है कि केंद्र सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की योजनाओं से परियोजना को जोड़ा जाए तो पेंड्रारोड को राष्ट्रीय साहित्यिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों से अध्ययन कर DPR तैयार कराने की मांग
सांसद ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री से आग्रह किया है कि इस विषय पर विशेषज्ञ समिति अथवा भारतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत विशेषज्ञों के माध्यम से तथ्यात्मक अध्ययन कराया जाए तथा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर आवश्यक केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पत्र की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा कलेक्टर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को भी आवश्यक कार्रवाई एवं अभिलेख/स्थल संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भेजी गई है।
पेंड्रारोड की ऐतिहासिक स्मृतियों को राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित करने की यह पहल क्षेत्र के साहित्यिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में सामने आई है।