मैडम की डिमांड है मोर मोर टायर चोरों से कर रही तोल मोल
टायर चोरी के 4 आरोपी हिरासत में, 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं, महिला अधिकारी की ‘डिमांड’ पर उठे गंभीर सवाल
अनूपपुर। सोडा फैक्ट्री से टायर चोरी के मामले में चार लोगों को पकड़े जाने के बाद अब कार्रवाई से ज्यादा चर्चा उस कार्रवाई को लेकर हो रही है, जो 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाई है। आरोपियों को न तो विधिवत कार्रवाई के तहत आगे भेजा गया और न ही उन्हें छोड़ा गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मामला किस इंतजार में अटका हुआ है…
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एक महिला अधिकारी की भूमिका और कथित पैसों की मांग को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के बाद से ही मामले को निपटाने को लेकर कथित तौर पर पैसों की मांग की चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि कथित डिमांड 2 पेटी से शुरू हुई, लेकिन बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंची, यही वजह है कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कार्रवाई अधर में लटकी होने की बात सामने आ रही है।
अब असली सवाल यह है कि यदि चार लोगों को चोरी के मामले में पकड़ा गया है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही,और यदि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं तो उन्हें हिरासत में रखने का आधार क्या है…
क्या मामला कानून की प्रक्रिया से चलेगा या कथित डिमांड पूरी होने के बाद ही आगे बढ़ेगा…
एक तरफ पुलिस-प्रशासन लगातार पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई का दावा करता है, वहीं इस मामले में उठ रहे आरोप उन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल महिला अधिकारी की कथित भूमिका को लेकर है। क्या वास्तव में कार्रवाई को पैसों की कथित मांग से जोड़ा जा रहा है, अगर ऐसा नहीं है तो फिर चार लोगों को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने की वजह क्या है…
हालांकि, कथित पैसों की मांग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि कार्रवाई कानून के मुताबिक हो रही है या किसी अन्य दबाव अथवा लेन-देन की चर्चा के कारण मामला लंबा खिंच रहा है।
अब निगाहें वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। क्या वे इस पूरे मामले की जांच कराएंगे और कथित डिमांड के खेल की सच्चाई सामने लाएंगे, या फिर चारों आरोपियों की तरह यह सवाल भी हिरासत में ही पड़ा रहेगा…