साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत, स्टाम्प शुल्क 100 रुपए करने की तैयारी मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत शुल्क एक हजार से घटाकर सौ रुपए करने की प्रक्रिया जारी, ठगी की रकम वापस पाने में कम होगा आर्थिक बोझ
साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत, स्टाम्प शुल्क 100 रुपए करने की तैयारी
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत शुल्क एक हजार से घटाकर सौ रुपए करने की प्रक्रिया जारी, ठगी की रकम वापस पाने में कम होगा आर्थिक बोझ
कटनी। साइबर ठगी का शिकार होकर अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले लोगों को राहत देने की दिशा में राज्य शासन ने पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर साइबर अपराध पीड़ितों को ठगी गई धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को अधिक किफायती बनाने के लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत देय स्टाम्प शुल्क को 1,000 रुपये से घटाकर 100 रुपये करने की प्रक्रिया जारी है। इस बदलाव से पीड़ितों को राहत मिलेगी और धनराशि की वापसी की प्रक्रिया में लगने वाला आर्थिक भार कम होगा।
वर्तमान में मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से धनराशि वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया में 1,000 रुपये स्टाम्प शुल्क के रूप में देय हैं। इसे घटाकर 100 रुपये किए जाने से पीड़ितों को 900 रुपये की बचत होगी। यानी स्टाम्प शुल्क में 90 प्रतिशत की कमी प्रस्तावित है। इससे ठगी की रकम वापस पाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कम खर्चीली हो सकेगी।
पीड़ितों को राहत देने पर जोर
राज्य शासन की इस पहल का उद्देश्य साइबर अपराध से प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत देना और उनकी धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को सरल एवं किफायती बनाना है। साइबर ठगी के मामलों में पीड़ित पहले ही आर्थिक नुकसान झेलते हैं। ऐसे में धनराशि की वापसी से जुड़ी प्रक्रिया का खर्च कम होने से उन्हें अतिरिक्त राहत मिल सकती है।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
साइबर अपराधों से बचाव और ठगी की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। राज्य शासन का जोर साइबर अपराधों की रोकथाम, नागरिकों को जागरूक करने और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने पर है। स्टाम्प शुल्क में प्रस्तावित कमी को इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम के रूप में देखा जा रहा है।