हत्या के आरोपी कर्मचारी पर 15 दिन बाद भी निलंबन नहीं! जनजातीय कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

शहडोल। हत्या जैसे गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के बावजूद संबंधित शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय निलंबन आदेश जारी नहीं होने का मामला अब सवालों के घेरे में है। सीधी थाना पुलिस द्वारा कौशल प्रसाद रैदास को 23 सितंबर 2026 को हत्या के प्रकरण में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद भी 8 अक्टूबर तक निलंबन आदेश जारी नहीं होने की स्थिति ने सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, शहडोल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है?
23 सितंबर को गिरफ्तारी,
न्यायालय में पेशी का भी उल्लेख
उपलब्ध गिरफ्तारी सूचना के अनुसार, कौशल प्रसाद रैदास, निवासी दरैन खारिका टोला, थाना सीधी, जिला शहडोल को थाना सीधी के अपराध क्रमांक 221/2026 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत 23 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दस्तावेज में उसी दिन दोपहर 3 बजे उन्हें जेएमएफसी न्यायालय, जयसिंहनगर के समक्ष पेश किए जाने की जानकारी भी दर्ज है। यानी गिरफ्तारी की तारीख, अपराध क्रमांक और संबंधित धारा का उल्लेख दस्तावेज में स्पष्ट रूप से मौजूद है।
15 दिन से अधिक बीते,
कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट नहीं
23 सितंबर से 8 अक्टूबर के बीच 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित कर्मचारी के निलंबन आदेश की पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सहायक आयुक्त कार्यालय को गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना प्राप्त हो गई थी? यदि सूचना मिल चुकी थी, तो नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया कहां तक पहुंची? क्या पुलिस से औपचारिक सूचना या आवश्यक अभिलेख मांगे गए थे, अथवा फाइल किसी स्तर पर लंबित है? विभाग को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

48 घंटे के प्रावधान पर भी
जवाबदेही का सवाल
शासकीय सेवकों के निलंबन से संबंधित नियमों में 48 घंटे से अधिक न्यायिक या अन्य अभिरक्षा में रहने की स्थिति में निलंबन का प्रावधान लागू हो सकता है, बशर्ते संबंधित सेवा नियमों की शर्तें पूरी हों। यदि इस मामले में भी यह प्रावधान लागू होता है, तो 15 दिन से अधिक समय तक आदेश जारी नहीं होने की स्थिति की जांच जरूरी है। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय को करना है।
उच्च अधिकारी स्पष्ट करें,
कहां अटकी कार्रवाई?
अब जरूरत है कि विभाग के उच्च अधिकारी बताएं कि गिरफ्तारी की सूचना कब प्राप्त हुई, क्या कार्रवाई प्रस्तावित या शुरू की गई और आदेश जारी नहीं होने का कारण क्या है। यदि प्रक्रिया में देरी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। गंभीर आपराधिक प्रकरण में विभागीय नियमों का पालन समय पर हुआ या नहीं, यह स्पष्ट करना प्रशासन की जवाबदेही है।