गौरेला: जानलेवा हमले के मामले में दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा
गौरेला, 12 जून 2026
द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पेण्ड्रारोड, बिलासपुर (छ०ग०) की अदालत ने हत्या के प्रयास और घर में घुसकर गंभीर मारपीट करने के एक मामले में अपना कड़ा निर्णय सुनाया है।
पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने सत्र प्रकरण क्रमांक-55/2025 में दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।
इस पूरे मामले में शासन (अभियोजन पक्ष) की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक (AGP) श्री कौशल सिंह ने पैरवी की और आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यायालय में पेश किए गए अभियोजन पक्ष के तथ्यों के अनुसार:
दिनांक और समय: यह घटना 20 जुलाई 2025 की रात लगभग 11:30 बजे घटित हुई थी।
स्थान: थाना गौरेला के अंतर्गत ग्राम पतेराटोला स्थित प्रार्थी दिनेश कुमार त्रिपाठी का घर।
वारदात का तरीका: प्रार्थी दिनेश कुमार त्रिपाठी अपनी पत्नी और बच्चे के साथ सो रहे थे, तभी बाहर से गाली देने की आवाज आई। प्रार्थी द्वारा मना करने पर आरोपी राजकुमार उर्फ छोट भाई गेट कूदकर अंदर घुस गया और मेन दरवाजे को लात और रॉड से तोड़कर प्रार्थी को खींचते हुए बाहर ले गया।
जानलेवा हमला: बाहर दोनों आरोपियों ने मिलकर प्रार्थी को पकड़ लिया। प्रशांत उर्फ गोलू ने प्रार्थी के गले में धारदार गुप्ती टिका दी और जान से मारने की धमकी दी, जबकि राजकुमार ने जान से मारने की नीयत से उनका गला दबा दिया।
गंभीर चोटें: इस मारपीट में पीड़ित दिनेश कुमार त्रिपाठी के हाथ, माथा, होंठ, सिर, पीठ, सीना और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बहा।
न्यायालय का फैसला और सजा
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष (AGP कौशल सिंह) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर 12 जून 2026 को निम्नलिखित दंडादेश पारित किया:
1. प्रशांत उर्फ गोलू (उम्र- 28 वर्ष)
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-109 (2) सहपठित धारा 3 (5) के तहत हत्या के प्रयास के लिए आजीवन कारावास और 5,000/- रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
अवैध रूप से गुप्ती (प्रतिबंधित हथियार) रखने और उपयोग करने पर आयुध अधिनियम की धारा 25 (1-क) और 27(2) के तहत 07-07 वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000-1,000/- रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
अर्थदंड अदायगी न करने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है।
2. राजकुमार उर्फ छोट भाई (उम्र- 34 वर्ष)
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-109 (2) के तहत हत्या के प्रयास के लिए आजीवन कारावास और 5,000/- रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
गृह अतिचार (धारा-331(4)) के तहत 02 वर्ष का सश्रम कारावास और 1,000/- रुपये का अर्थदंड दिया गया है।
न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में राजकुमार को धारा 296 (ख) के अपराध से दोषमुक्त कर दिया है।
पीड़ित को मुआवजा:
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 395(1) (ख) के तहत, आरोपियों पर लगाए गए जुर्माने में से 5,000/- रूपए की राशि पीड़ित दिनेश कुमार त्रिपाठी को क्षतिपूर्ति (प्रतिकर) के रूप में प्रदान की जाएगी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों आरोपियों की सजाएं (जुर्माना न देने पर दी गई अतिरिक्त सजा को छोड़कर) साथ-साथ चलेंगी।