10वीं की फर्जी अंकसूची से सरकारी नौकरी का खेल! डाक विभाग में फर्जीवाड़े का खुलासा, CBI की बड़ी कार्रवाई कटनी के 3 ग्रामीण डाक सेवक बर्खास्त
10वीं की फर्जी अंकसूची से सरकारी नौकरी का खेल!
डाक विभाग में फर्जीवाड़े का खुलासा, CBI की बड़ी कार्रवाई कटनी के 3 ग्रामीण डाक सेवक बर्खास्त
कटनी। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए दसवीं की फर्जी अंकसूची और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शिकंजा कस दिया है। ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए चयन हासिल करने के मामले में जबलपुर CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 8 नामजद अभ्यर्थियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। इनमें तीन आरोपी कटनी जिले में ग्रामीण डाक सेवक के रूप में पदस्थ रहे, जिन्हें विभागीय स्तर पर बर्खास्त कर दिया गया है।
मामला सामने आने के बाद अब जांच की आंच केवल फर्जी अंकसूची लगाने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। CBI यह भी खंगाल रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर भर्ती प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल कराने तक कहीं कोई संगठित नेटवर्क या बिचौलिये सक्रिय तो नहीं थे।
पोर्टल पर अपलोड की फर्जी अंकसूची, मिल गई नौकरी
जानकारी के मुताबिक जनवरी 2024 और जुलाई 2024 में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों ने डाक विभाग के पोर्टल पर अपनी दसवीं की सेल्फ अटेस्टेड अंकसूची अपलोड की थी। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में चयन हुआ और अभ्यर्थियों को अलग-अलग डाकघरों में पदस्थापना भी दे दी गई।
नौकरी मिलने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में अंकसूचियों की वास्तविकता पर सवाल खड़े हुए। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने ऐसे प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किया था, जिनमें अंक वास्तविक रिकॉर्ड से अलग दर्शाए गए थे।
कटनी में तीन जगह हुई थी पदस्थापना
CBI की कार्रवाई में सामने आए आठ नामजद आरोपियों में तीन का संबंध कटनी जिले से बताया गया है। इनमें—
बद्री प्रसाद यादव — संसारपुर उपडाकघर
देवेन्द्र सिंह चौहान — उमरियापान उपडाकघर
रमाकांत शर्मा — मोहतरा उपडाकघर
शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों ने अलग-अलग अवधि में ग्रामीण डाक सेवक के रूप में सेवाएं दीं। फर्जी दस्तावेजों का मामला सामने आने के बाद डाक विभाग ने इनकी अस्थायी नियुक्तियां निरस्त कर दीं और अब CBI की जांच में इनके दस्तावेजों एवं भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
आठ ठिकानों पर एक साथ CBI की दबिश
प्रकरण दर्ज करने के बाद CBI ने आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए हैं। नामजद आरोपियों में मानवेन्द्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक मामले में बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और झारखंड से जुड़े कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल कर अंक बढ़ाकर दर्शाने और भर्ती में चयन हासिल करने की कोशिश की गई।
फर्जी अंकसूची से आगे अब नेटवर्क की तलाश
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि जांच अब सिर्फ उन अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज लगाए। CBI यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी अंकसूचियां और प्रमाण-पत्र तैयार किसने किए, इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया और भर्ती प्रक्रिया में किसी लोकसेवक या निजी बिचौलिए ने सहयोग किया या नहीं।
मामले में CBI ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 एवं 471 सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जांच जारी है और आगे और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का यह मामला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें CBI की आगे की जांच पर हैं कि फर्जी अंकसूची के इस खेल की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें अभ्यर्थियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।