पिछले मानसून में बही पुलिया को सालभर में भी नहीं सुधार सका विभाग! अब संधारण अवधि खत्म; मप्र को जोड़ने वाला मार्ग इस बारिश में पूरी तरह होगा तबाह

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GPM – marwahi

एक साल से मौत के कुएं में तब्दील है मरवाही-मालाडाँड़ मुख्य मार्ग; कागजी फाइलों और खतरे के बोर्ड के भरोसे छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश की लाइफलाइन!

छत्तीसगढ़ से सीधे पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश (मप्र) की सीमा को जोड़ने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय मार्ग मरवाही-सिवनी से मालाडाँड़ (कुल लंबाई 7.07 किमी) पर भ्रष्टाचार, घोर प्रशासनिक लापरवाही और जनता की जान से खिलवाड़ का एक ऐसा मामला सामने आया है जो व्यवस्था को पूरी तरह बेनकाब करता है। इस मार्ग पर स्थित मुख्य पुलिया के पास की आधी पक्की सड़क धंस चुकी है। चौंकाने वाली हकीकत यह है कि यह मार्ग पिछले 1 वर्ष से इसी बदहाल और खतरनाक स्थिति में पड़ा हुआ है, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए विभाग ने सालभर में यहाँ तिनका तक नहीं हिलाया।

एक साल पहले पिछले मानसून में बही थी पुलिया, सालभर से देख रहा प्रशासन राह

स्थानीय ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि यह सड़क और पुलिया आज या कल में क्षतिग्रस्त नहीं हुई है। यह पिछले वर्ष (2025) के मानसून सीजन में हुई भारी बारिश के दौरान ही पानी के तेज बहाव में बह गई थी।

हद तो यह है कि पिछले साल जब यह हादसा हुआ, तब से लेकर पूरा एक साल बीत गया। इस बीच पूरा शीतकाल और लंबा ग्रीष्मकाल निकल गया, जिसमें इस पुलिया का पुनर्निर्माण बेहद आसानी से कराया जा सकता था। लेकिन ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण विभाग के आला अधिकारी पूरे साल फाइलों को दबाए बैठे रहे। पिछले एक साल से क्षेत्र की जनता अपनी जान हथेली पर रखकर इस संकरे और खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर है।

31 मार्च को संधारण अवधि समाप्त; अब बजट का रोना रोएगा विभाग

इस महा-लापरवाही में सबसे बड़ा तकनीकी पेंच विभाग के आधिकारिक सूचना पटल (बोर्ड) से उजागर हुआ है। बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इस पैकेज (CG-10M+AR-10) के पंचवर्षीय संधारण कार्य की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी, जो कि अब समाप्त हो चुकी है।

इसका सीधा मतलब यह है कि जब पिछले साल मानसून में यह पुलिया बही थी, तब ठेकेदार (मेसर्स दहंगल बिल्डर्स, गौरेला) की संधारण अवधि लागू थी और विभाग के पास ठेकेदार से इसे मुफ्त में दुरुस्त करवाने का पूरा कानूनी अधिकार था। लेकिन अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की नीति के चलते समय-सीमा को जानबूझकर खत्म होने दिया गया। अब चूंकि 31 मार्च 2026 को समय-सीमा खत्म हो चुकी है, इसलिए ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गया है। अब विभाग नए बजट और नई निविदा की कागजी प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर इस बारिश में भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

इस बार ‘परदा’ गिरना तय: छत्तीसगढ़-मप्र का संपर्क पूरी तरह टूटने की कगार पर

वर्तमान में इस साल का मानसून सीजन फिर से शुरू हो चुका है और क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने इस एक साल पुराने जख्म को और हरा कर दिया है। पुलिया के ह्यूम पाइप और सुरक्षा दीवार पहले ही मलबे में तब्दील हैं, और बची हुई आधी सड़क के नीचे की मिट्टी भी अब तेजी से खिसक रही है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि जो सड़क पिछले मानसून में आधी बही थी, वह इस बार लगातार हो रही बारिश के कारण पूरी तरह पानी में बह जाएगी। संधारण की अवधि खत्म होने के कारण विभाग तुरंत कोई बड़ा काम करा नहीं पाएगा, और नतीजा यह होगा कि यह अंतरराज्यीय मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का संपर्क पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के व्यापार और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं पर ब्रेक लग जाएगा।

खतरे का बोर्ड’ टांगकर किस बड़े हादसे का इंतजार?

एक साल तक कोई ठोस कार्रवाई न करने वाले विभाग ने अपनी चमड़ी बचाने के लिए सड़क किनारे एक चेतावनी बोर्ड टांग दिया है। इस बोर्ड पर खोपड़ी के खतरनाक निशान के साथ लिखा है— “खतरा: आगे सड़क क्षतिग्रस्त है, कृपया वाहन धीरे चलाएं।”

जनता पूछ रही है कि पिछले एक साल से सिर्फ यह ‘खतरे का बोर्ड’ लगाकर विभाग किस भीषण हादसे का इंतजार कर रहा है? रात के अंधेरे या तेज आंधी-बारिश में यहाँ कोई भी अंतरराज्यीय वाहन चालक सीधे इस गहरी खाई में समा सकता है, जिससे भारी जनहानि होना तय है।

ग्रामीणों ने दी उग्र चक्काजाम की चेतावनी

पिछले एक साल से प्रताड़ित हो रहे स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने जिला प्रशासन व विभाग के उच्चाधिकारियों को दोटूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब कागजी लीपापोती और बजट का रोना रोना बंद किया जाए। आपातकालीन फंड जारी कर तत्काल नई पुलिया का निर्माण और सड़क का सुदृढ़ीकरण शुरू किया जाए। यदि इस बारिश में यह अंतरराज्यीय रास्ता बंद हुआ या कोई जनहानि हुई, तो क्षेत्र की जनता चक्काजाम कर उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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